कमिश्नर पाओलो जेंटिलोनी ने 27 मई को यह घोषणा की कि यूरोपीय संघ (ईयू) ने विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं की मदद करने के लिए 750 बिलियन यूरो रिकवरी फंड का प्रस्ताव रखा है क्योंकि ये राष्ट्र कोरोना वायरस महामारी के कारण महा मंदी झेल रहे हैं.
पाओलो जेंटिलोनी ने यूरोपीय संघ द्वारा घोषित फंड के आकार की पुष्टि भी की है. वे यूरोपीय संघ के कार्यकारी निकाय में आर्थिक मामलों के प्रभारी हैं. यूरोपीय संघ द्वारा यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब 27 राष्ट्रीय व्यापार गुट अब तक की सबसे बड़ी मंदी में का सामना कर रहा है. दरअसल, कोविड -19 की वजह से विभिन्न राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थायें तबाह हो रही हैं.
मुख्य विशेषताएं
• स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों, नौकरियों और व्यवसायों को कायम रखने के लिए, हर देश ने यूरोपीय संघ की घाटे की सीमा को लांघ लिया है.
• इससे पहले, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने एक मुश्त $ 543 बिलियन फंड देने के बारे में अपनी सहमति व्यक्त की थी. आर्थिक उपायों की कड़ी में और ज्यादा नकदी को जोड़ने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव रखा गया है ताकि आर्थिक मंदी का सामना करने के लिए ब्लॉक अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे सके.
• कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित देशों और क्षेत्रों की मदद करने के लिए इस योजना में वित्तीय बाजारों में यूरोपीय संघ का उधार का पैसा भी शामिल था.
• यूरोपीय आयोग का यह खाका (ब्लू प्रिंट) कई मायनों में फ्रेंको-जर्मन योजना से मिलता-जुलता है, जबकि इसमें यूरोपीय संघ के अगले दीर्घकालिक बजट के लिए धन भी संलग्न है.
अनुदान और ऋण का प्रश्न
इस ऋण और अनुदान से जुड़ा एक महत्त्वपूर्ण सवाल यह है कि कितना पैसा ऋण के तौर पर मिलेगा और कितना पैसा अनुदान के तौर पर दिया जायेगा.
डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, और नीदरलैंड किसी भी विशेष मांग या सीमा को निर्धारित किये बिना धन देने के संबंध में अनिच्छुक रहे हैं. इस अनिच्छा के कारण उक्त अनुदान का संयुक्त रूप से विरोध हो सकता है जिससे यह परियोजना रुक सकती है.
स्वीडिश वित्त मंत्री, मैग्डेलेना एंडरसन ने कहा है कि सवाल यह है कि क्या यह अनुदान होगा या ऋण, और अगर यह अनुदान होगा तो इसका भुगतान कौन करेगा. उन्होंने आगे कहा कि ऋण चर्चा के लिए एक ज्यादा दिलचस्प विषय होगा, लेकिन हमें अभी भी उन शर्तों के बारे में चर्चा करने की आवश्यकता है जिनके तहत हम ये ऋण देंगे.
अनुदान या ऋण के सवाल के साथ, इस फंड की घोषणा से यूरोपीय संघ में गरमागरम बहस होना निश्चित है. गत 01 जनवरी से नई बजट अवधि शुरू हो गई है और ये देश धन पाने के लिए बेताब हो रहे हैं. यह महत्वपूर्ण होगा कि सभी 27 देश रिकवरी फंड को तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए अवश्य सहमत हों.
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