तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का 07 अगस्त 2018 को चेन्नई के अस्पताल में निधन हो गया. वे 94 वर्ष के थे. उन्होंने शाम छह बजकर दस मिनट पर अंतिम सांस ली. करूणानिधि का रक्तचाप कम होने के बाद 28 जुलाई को उन्हें गोपालपुरम स्थित आवास से कावेरी अस्पताल भेजा गया था. पहले वह वार्ड में भर्ती थे बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया था.
एम करुणानिधि का पार्थिव शरीर उनके गोपालपुरम निवास पर लाया जाएगा. बाद में पार्थिव शरीर करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा की सदस्य कनिमोझी के सीआईटी कॉलोनी निवास पर ले जाया जाएगा ताकि उनके परिवार के सदस्य श्रद्धांजलि दे पाएं.
एम करूणानिधि का राजनीतिक जीवन
• मुत्तुवेल करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को मद्रास प्रेसीडेंसी के तिरुक्कुवलई में हुआ था.
• एम करुणानिधि (M Karunanidhi) को लेखक, नाटककार और पटकथा लेखक के रूप में जाना जाता था. करुणानिधि के समर्थक उन्हें 'कलाईनार' यानि कि "कला का विद्वान" भी कहते हैं.
• करुणानिधि ने 20 वर्ष की उम्र में तमिल फिल्म उद्योग की कंपनी 'ज्यूपिटर पिक्चर्स' में पटकथा लेखक के रूप में अपना करियर शुरू किया था.
• महज चौदह वर्ष की आयु में वे हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़ गए थे. जल्द ही उन्होंने अपने क्षेत्र के युवाओं को साथ लेकर एक संगठन बना लिया. यह संगठन 'मनावर नेसन' नाम का एक अखबार प्रकाशित करता था जो कि हाथ से लिखकर तैयार किया जाता था. इसके बाद करुणानिधि ने एक छात्र संगठन 'तमिलनाडु तमिल मनावर मंद्रम' की स्थापना की.
• करुणानिधि पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उनका कार्यकाल 1969–71, 1971–76, 1989–91, 1996–2001 और 2006–2011 के बीच था.
• अपने 60 वर्ष के राजनीतिक करियर में करुणानिधि ने हर चुनाव में अपनी सीट पर जीत हासिल की थी. वे कभी अपनी सीट से हारे नहीं थे.
करुणानिधि का व्यक्तिगत जीवन |
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करुणानिधि से जुड़े विवाद
करुणानिधि पर सरकारिया कमीशन द्वारा वीरानम परियोजना के लिए निविदाएं आवंटित करने में भष्टाचार का आरोप लगाया गया. वर्ष 2001 में करुणानिधि, पूर्व मुख्य सचिव के. ए. नाम्बियार और अन्य कई लोगों के एक समूह को चेन्नई में फ्लाईओवर बनाने में भष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर कई आरोप लगाए गए लेकिन उनके और उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला तथा उन्हें बरी कर दिया गया.
द्रविड़ आंदोलन क्या है? |
वर्ष 1937 में मद्रास प्रेसीडेंसी में सी राजगोपालाचारी के नेतृत्व में बनी इंडियन नेशनल कांग्रेस की पहली सरकार ने स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य कर दिया था. इस कदम का विभिन्न स्थानों पर भारी विरोध किया गया था. इसका विरोध करने वालों में सबसे पहले ईवी रामासामी, जिन्हें पेरियार के नाम से भी जाना जाता है, का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. साथ ही जस्टिस पार्टी (बाद में द्रविड़ कड़गम से प्रसिद्ध) ने भी तीखा विरोध किया था. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) इसी द्रविड़ कड़गम से अलग होकर बनी पार्टी है, जिसने 1965 में हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया था तथा एम करुणानिधि इसके नेता थे. एम करुणानिधि अपने निधन तक डीएमके प्रमुख रहे थे. |
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