जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को जल्द ही कैट के दायरे में लाया जाएगा: जितेन्द्र सिंह

Feb 18, 2020, 15:04 IST

जल्द ही कैट के तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर होगा तथा वहां की गैर केंद्रीय और संघीय क्षेत्र की सेवाओं से जुड़े मामले भी उसके न्यायाधिकार क्षेत्र में होंगे. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में कैट की विशेष पीठ गठित की जाएगी.

Jitendra singh CAT
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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने हाल ही में घोषणा कि केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख को जल्‍दी ही केन्‍द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के दायरे में लाया जाएगा. जितेन्‍द्र सिंह दिल्ली में कैट की अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. जितेंद्र सिंह कैट के नोडल विभाग के प्रभारी भी हैं.

जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैट के पास जम्मू और कश्मीर क्षेत्र से संबंधित मामलों और मुद्दों को संभालने का अधिकार क्षेत्र होगा. उन्होंने कहा कि अधिकरण केन्‍द्रशासित प्रदेशों की सेवाओं से संबंधित विवादों और अन्‍य मुद्दों पर सुनवाई करेगा. अभी तक जम्‍मू-कश्‍मीर में कैट का दायरा केवल केन्‍द्रीय सेवाओं से जुड़े मुद्दों तक सीमित था.

जम्मू-कश्मीर में कैट की बेंच

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने बताया कि जम्मू और कश्मीर में कैट की एक विशेष पीठ तैयार की जाएगी. इसके लिए सरकार जल्द ही अपने सदस्यों की नियुक्ति करने जा रही है. चंडीगढ़ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की बेंच जम्मू और कश्मीर में सेवा विवादों और अन्य मामलों का निपटारा करेगी जब तक कि जम्मू-कश्मीर बेंच का गठन नहीं हो जाता. राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में कैट की विशेष पीठ गठित की जाएगी.

कैट में 66 सदस्य

जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति को लेकर कार्रवाई कर रहा है. कैट के अध्यक्ष द्वारा भेजी गई जरूरतों के आधार पर खाली पदों को भरने की दिशा में कार्रवाई जारी है. राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने बताया कि कैट के सदस्यों की संख्या 66 होनी चाहिए. इस समय कई पद खाली होने के कारण फिलहाल सदस्यों की संख्या 39 है. उन्होंने कहा कि सरकार इन खाली पदों को भरने हेतु गंभीरता से काम कर रही है.

केन्‍द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट)

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की प्रमुख बेंच दिल्ली में है. कैट में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्य शामिल हैं. राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति की जाती है. न्यायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों से कैट के सदस्यों की नियुक्ति होती है. सेवा की अवधि 6 वर्ष या अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 62 वर्ष जो भी पहले हो, तक होती है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कैट का कोई भी अन्य सदस्य अपने कार्यकाल के बीच में ही अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज सकता है.

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कैट का कार्यप्रणाली

कैट सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की संहिता में निर्धारित प्रक्रिया हेतु बाध्य नहीं है, किन्तु प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित है. एक अधिकरण के पास उसी प्रकार की शक्तियां होती हैं जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की संहिता के अंतर्गत एक सिविल कोर्ट के पास होती हैं. कोई व्यक्ति अधिकरण में आवेदन कानूनी सहायता के माध्यम से या फिर खुद हाजिर होकर कर सकता है.

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने 05 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त कर दिया था. केंद्र सरकार ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने का फैसला किया था.

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Vikash Tiwari is an content writer with 3+ years of experience in the Education industry. He is a Commerce graduate and currently writes for the Current Affairs section of jagranjosh.com. He can be reached at vikash.tiwari@jagrannewmedia.com
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