मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-ऑयन बैटरी स्वदेश में ही निर्मित की जाएगी. इस उद्देश्य के साथ भारत सरकार, इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन और मुनोथ इंडस्ट्रीज आंध्र प्रदेश के तिरुपति शहर में पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना बना रही है.
इस प्लांट को 799 करोड़ रुपये में तीन फेज में सेट-अप किया जाएगा. इस प्लांट के शुरू होने के बाद करीब 1,700 लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे.
क्यों थी आवश्यकता? |
भारत में फिलहाल जितनी भी कंपनियां मोबाइल असेंबल करती हैं, वह विदेश से बैटरी मंगाती हैं. इस वजह से उसपर लागत ज्यादा आती है. देश में लिथियम-ऑयन बैटरी के असेंबलिंग और पैकेजिंग यूनिट्स बड़ी तादाद में मौजूद हैं, लेकिन एक भी बैटरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है. यह प्लांट देश का पहला कोर-कॉम्पोनेंट प्लांट होगा. |
लाभ
• इस प्लांट को भारत सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत लगाया जा रहा है, भारत सरकार की इसमें 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी.
• इससे न केवल मोबाइल उद्योग को फायदा होगा बल्कि यह प्लांट हेल्थ सेक्टर और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए भी फायदेमंद होगा.
• देश में इस समय हर साल मोबाइल फोन में 400 से 500 मिलियन लिथियम बैटरी का उपयोग होता है.
• लिथियम बैटरी से निकलने वाले ई-कचरे से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में भी नई पॉलिसी जल्द बनाई जाएगी.
स्वदेशी प्रोद्योगिकी
डॉ. गोपु कुमार की अध्यक्षता में सीएसआईआर- सीईसीआरआई में एक समूह ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) नई दिल्ली, सीएसआईआर-सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक्स रिसर्च इंस्टीच्यूट (सीएसआईआर-सीजीसीआरआई) कोलकाता एवं भारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईआईसीटी) हैदराबाद की साझेदारी में लिथियम-आयन बैटरियों की एक स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित की है.
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