महाराष्ट्र विधानसभा ने मराठा आरक्षण को मंजूरी दी

Nov 30, 2018, 09:13 IST

मराठा समुदाय को ये आरक्षण राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) के तहत दिया जाएगा. अब इस बिल को विधानपरिषद में रखा जाएगा. वहां से पास होने के बाद ये कानून का रूप ले लेगी.

Maharashtra legislative assembly passes Maratha Reservation Bill
Maharashtra legislative assembly passes Maratha Reservation Bill

महाराष्‍ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) में मराठा आरक्षण बिल (Maratha Reservation Bill) एकमत के साथ पास हो गया है. महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने पर सहमत हो गई है.

इसके साथ ही पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जाति/जनजातियों, अल्पसंख्यक समूहों व मराठाओं को दिया जाने वाला कुल आरक्षण 68 फीसदी होगा. सरकार अब जल्द ही कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर इसे अमल में लाने का प्रयास करेगी.

मराठा समुदाय को ये आरक्षण राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) के तहत दिया जाएगा. अब इस बिल को विधानपरिषद में रखा जाएगा. वहां से पास होने के बाद ये कानून का रूप ले लेगी.

महाराष्ट्र में 76 फीसदी मराठी खेती-किसानी और मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं. वहीं सिर्फ 6 फीसदी लोग सरकारी-अर्ध सरकारी नौकरी कर रहे हैं.

16 प्रतिशत का आरक्षण:

बिल के मुताबिक, राज्य सरकार राज्य की 31 प्रतिशत मराठा आबादी को 16 प्रतिशत का आरक्षण देने जा रही है. एसबीसीसी ने मराठा समुदाय को 'सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा' करार दिया है. मराठा समुदाय की राज्य में 30 प्रतिशत आबादी है. यह समुदाय लंबे समय से अपने लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहा है.

कार्रवाई रिपोर्ट:

मराठा आरक्षण विधेयक के साथ ही राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) की मराठा आरक्षण से जुड़ी अनुशंसाओं पर उठाए गए कदमों के बारे में दो पन्नों की कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) को भी पटल पर रखा गया. इस मुद्दे पर राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिमंडल की उप समिति की बैठक हुई.

आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित:

बता दें कि मराठों के आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित पड़ी थी. राज्य पिछड़ा आयोग ने 25 विभिन्न मानकों पर मराठों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर पिछड़ा होने की जांच की. इसमें से सभी मानकों पर मराठों की स्थिति दयनीय पाई गई. इस दौरान किए गए सर्वे में 43 हजार मराठा परिवारों की स्थिति जानी गई.

मराठा आरक्षण की मांग हिंसक हो गई थी:

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर वर्ष 2016 से 58 मार्च निकाले गए. हाल ही में मराठों का उग्र विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला था. यह मामला कोर्ट के सामने लंबित होने से सरकार ने पिछड़े आयोग को मराठा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति जानने की जिम्मेदारी दी थी.

Vikash Tiwari is an content writer with 3+ years of experience in the Education industry. He is a Commerce graduate and currently writes for the Current Affairs section of jagranjosh.com. He can be reached at vikash.tiwari@jagrannewmedia.com
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