मेकोंग नदी में पहली बार डॉल्फिन की जनसंख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई

Apr 24, 2018 15:52 IST

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फेडरेशन (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) तथा कम्बोडिया सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मेकोंग नदी में पहली बार लुप्तप्राय डॉल्फिन प्रजाति की जनसंख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह वृद्धि पिछले 20 वर्षों में पहली बार देखी गई है.

मेकोंग नदी में डॉल्फिन

मेकोंग नदी में पिछले दो वर्षों में जनगणना के दौरान डॉल्फिन की जनसंख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिसके तहत उनकी संख्या 80 से बढ़कर 92 हो गई है. वर्ष 1997 में पहली बार की गई जनगणना के दौरान उनकी जनसंख्या 200 दर्ज की गई थी. इसके बाद वर्ष 2015 में की गई जनगणना के अनुसार यह संख्या घटकर मात्र 80 रह गई थी.

विश्वभर के चुनिंदा स्थानों पर नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन विभिन्न प्रकार के खतरों से जूझ रही हैं जैसे निवास का ह्रास, प्रदूषित जल, बांध निर्माण तथा गैरकानूनी शिकार जैसे कारणों से इनकी जनसंख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है. कुछ देशों में जाल से मछली पकड़ना प्रतिबंधित है. कैलिफ़ोर्निया में 2017 में यह प्रतिबंध लगा दिया गया था.

डॉल्फिन की निवास स्थलों से पिछले दो वर्ष में 358 किलोमीटर लम्बे गैरकानूनी जाल पकड़े गये हैं. मेकोंग नदी में पेट्रोलिंग, स्थानीय नाविकों की सहायता से तथा नदी की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात करके इस क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या को बढ़ाया जा सका है.

 

200 वर्ष बाद केवल गाय सबसे बड़ी स्तनधारी जीव होगी: अध्ययन

 

भारत में गंगा डॉल्फिन की स्थिति

गंगा डॉल्फिन स्तनपाईयों की एक अत्यन्त ही दुर्लभ उपप्रजाति है जो भारत, बांगलादेश तथा नेपाल में गंगा और ब्रह्मपुत्र एवं उनकी सहायक नदियों में पायी जाती है. गंगा डॉल्फिन का वैज्ञानिक नाम प्लटैनिस्टा गैंजेटिका गैंजेटिका है. गंगा डॉल्फिन की नदी जल में उपस्थिति एक स्वस्थ पारितंत्र की संकेतक है. चूंकि नदी डॉल्फिन खाद्य श्रृंखला के शिखर पर होती है इसलिए इनकी पर्याप्त संख्या में उपस्थिति नदी में जैव-विविधता की संपन्नता को दर्शाती है. गंगा डॉल्फिन की वर्तमान में संख्या 2000 से भी कम रह गयी है जिसका मुख्य कारण गंगा का बढ़ता प्रदूषण, बांधों का निर्माण एवं अनियंत्रित शिकार है.

विलुप्तप्राय (endangered) और गंभीर रूप से विलुप्तप्राय (critically endangered) में अंतर

लुप्तप्राय

गंभीर रूप से विलुप्तप्राय

लुप्तप्राय यह दर्शाता है कि केवल प्रजातियों की एक सीमित आबादी है, और वे विलुप्त होने के जोखिम पर हैं.

विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी अवस्था में जब किसी विशेष प्रजाति के चुनिंदा मात्र अथवा कोई जीवित सदस्य न हों.

इन प्रजातियों को बचाया जा सकता है बशर्ते उनका पूरा ध्यान रखा जाए.

इन्हें बचा पाना बेहद मुश्किल होता है अथवा इन्हें नहीं बचाया जा सकता.

इसमें ब्लू व्हेल चिंपांज़ी, सिंधु नदी डॉल्फिन, गैलापागोस पेंगुइन, दक्षिण चीन बाघ आदि शामिल हैं.

इसमें पसिफ़िक वालरस, अटलांटिक ब्लूफिन टूना, लेदरबैक सी टर्टल आदि शामिल हैं.

 

 

Is this article important for exams ? Yes

DISCLAIMER: JPL and its affiliates shall have no liability for any views, thoughts and comments expressed on this article.

Latest Videos

Register to get FREE updates

    All Fields Mandatory
  • (Ex:9123456789)
  • Please Select Your Interest
  • Please specify

  • ajax-loader
  • A verifcation code has been sent to
    your mobile number

    Please enter the verification code below

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK