नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला करकी 65 वर्ष की आयु में 8 जून 2017 को सेवानिवृत्त हो गईं. उन्हें 11 जुलाई 2016 को नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. वह नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय की 25वीं मुख्य न्यायाधीश थी.
सुशीला करकी को 11 जुलाई 2016 को न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति गोपाल परजुली के स्थान पर नियुक्त किया गया, न्यायमूर्ति गोपाल परजुली वर्तमान में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं.
सुशीला करकी के बारे में-
• सुशीला करकी का जन्म 07 जून 1952 को नेपाल के पूर्वी मैदानी क्षेत्र के ग्राम शंकरपुर (विराटनगर) जिला-मोरांग में हुआ.
• सुशीला करकी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए की उपाधि प्राप्ति की.
• वर्ष 1978 में उन्हें त्रिभुवन विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि प्रदान की गई.
• सुशीला करकी शुरू में नेपाल के महेंद्र मल्टीपल परिसर में एक सहायक शिक्षक के रूप में काम करती थी. वर्ष 1979 में सुशीला करकी ने कानून को पेशे के रूप में अपना लिया.
• सुशीला करकी का विवाह नेपाली कांग्रेस के प्रसिद्ध युवा नेता दुर्गा प्रसाद सुवेदी से हुआ.
• जनवरी 2009 में उन्हें नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय में अस्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. नवंबर 2010 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया.
• अप्रैल 2016 में उनके पूर्ववर्ती कल्याण श्रेष्ठ के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया.
• न्यायमूर्ति करकी ने मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला, जिसमें प्राधिकरण के दुरुपयोग की जांच के लिए आयोग के मुख्य अभियुक्त के अपमान और पुलिस महानिरीक्षक की नियुक्ति भी शामिल थी.
नियुक्ति की संस्तुति-
तत्कालीन प्रधानमंत्री के पी ओली की अध्यक्षता में 10 अप्रैल 2016 को आयोजित संबैधानिक परिषद की बैठक में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद हेतु सुशीला करकी के नाम की संस्तुति की गई.
महाभियोग-
30 अप्रैल 2017 को कार्की के विरुद्ध संसद में महाभियोग प्रस्तुत किया गया और इसी के साथ नियमानुसार कार्की नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से निलंबित कर दी गयीं.
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