सिंचाई जल प्रबंधन को बेहतर बनाने और कृषि भूमि को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु नई योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का शुभारम्भ किया गया है. इस योजना का उद्देश्य सिंचाई क्षेत्र में निवेश को तर्कसंगत बनाना और पानी के दुरूपयोग को रोकना है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति-सीसीई ने 31 मई 2016 को नई योजना कृषि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना को मंजूरी दी.
इस योजना में पांच सालों के लिए पचास हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है.
मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए पांच हजार तीन सौ करोड़ आवंटित किए गए हैं.
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का मुख्य उद्देश्य-
- सिंचाई में निवेश में एकरूपता लाना, हर खेत को पानी के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करने के लिए खेतों में ही जल के इस्तेमाल करने की दक्षता को बढ़ाना.
- पानी के अपव्यय को कम करने के तरीके ईजाद करना.
- इसके अलावा इसके जरिए सिंचाई में निवेश को आकर्षित करने का भी प्रयास किया गया है.
- केन्द्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को विदर्भ और माराठ वाड़ा के किसानों द्वारा आत्महत्या की आशंका के दृष्टिगत और सूखा ग्रस्त क्षेत्रों हेतु एक सौ बत्तीस परियोजनाओं के लिए करीब 71 अरब 88 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है.
- एक सौ बत्तीस परियोजनाओं में से 98 विदर्भ और 34 मराठवाड़ा के लिए होंगी.
- देश में कुल 14 दशमलव दो करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि से 65 प्रतिशत में सिंचाई सुविधा नहीं है.
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