Qutub Minar Controversy: क्या 27 मंदिरों को तोड़कर बनी थी कुतुब मीनार इमारत, जानें पूरा विवाद

May 25, 2022, 11:16 IST

Qutub Minar Controversy: संस्कृति मंत्रालय ने कुतुब मीनार पर जारी विवाद के बीच स्पष्ट किया है कि उसने इसके परिसर की खुदाई का फिलहाल आदेश नहीं दिया गया है.

Qutub Minar Controversy
Qutub Minar Controversy

Qutub Minar Controversy: दिल्ली में कुतुब मीनार को लेकर विवाद (What is Qutub Minar Controversy) बहुत ही गहराता जा रहा है. संस्कृति मंत्रालय ने कुतुब मीनार पर जारी विवाद के बीच स्पष्ट किया है कि उसने इसके परिसर की खुदाई का फिलहाल आदेश नहीं दिया गया है.

इससे पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि संस्कृति मंत्रालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को कुतुब मीनार परिसर की खुदाई तथा वहां स्थित मूर्तियों की आइकोनोग्राफी कराने का आदेश दिया है. कुछ हिंदूवादी संगठनों ने हाल ही में कुतुब मीनार का नाम बदलकर विष्णु स्तंभ किए जाने की मांग की थी.

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कोर्ट में एक याचिका डाली गई

दिल्ली के साकेत कोर्ट में कुतुब मीनार में पूजा के अधिकार को लेकर एक याचिका डाली गई है. बता दें याचिका में 27 जैन एवं हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग की गई है. याचिकाकर्ता परिसर में पूजा का अधिकार देने की भी मांग कर रहे हैं. हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसका जमकर विरोध किया है.

कोर्ट ने क्या कहा?

कुतुब मीनार मामले पर दिल्ली की साकेत कोर्ट में 24 मई को सुनवाई पूरी हो गई. अब केस पर फैसला 09 जून को आएगा. हिंदू पक्ष ने कहा कि 27 मंदिरों को ध्वस्त करके कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद बनाई गई थी वहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए. हिंदू पक्ष की दलीलों के बीच कोर्ट ने कहा कि 800 सालों से यदि वहां देवता बिना पूजा के भी वास कर रहे हैं तो उनको ऐसे ही रहने दिया जा सकता है. कोर्ट अब इस मामले में 9 जून को फैसला देगा.

कुतुब मीनार का इतिहास

देश की प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों में से एक कुतुब मीनार है. ये इमारत साउथ दिल्ली के महरौली इलाके में स्थित है. लगभग 238 फीट की ऊंचाई वाला कुतुब मीनार भारत का सबसे ऊंचा पत्थरों का स्तंभ है. कुतुब मीनार इसके आसपास स्थित कई अन्य महत्वपूर्ण स्मारकों से घिरा हुआ तथा इस पूरे परिसर को कुतुब मीनार परिसर कहते हैं. इस इमारत के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर एवं मार्बल का उपयोग किया गया है. इसके अंदर गोल-गोल लगभग 379 सीढ़ियां हैं.

माना जाता है कि कुतुब मीनार का निर्माण साल 1199 से साल 1220 के दौरान कराया गया था. कुतुबुद्दीन-ऐबक ने कुतुब मीनार को बनाने की शुरुआत की थी तथा उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने पूरा कराया था. कुतुब मीनार को 14वीं और 15वीं सदी में बिजली गिरने और भूकंप से नुकसान पहुंचा था. फिरोज शाह तुगलक ने पहले इसकी शीर्ष दो मंजिलों की मरम्मत करवाई थी. सिकंदर लोदी ने 1505 में बड़े पैमाने पर इसकी मरम्मत कराई थी और इसकी ऊपरी दो मंजिलों का विस्तार किया था.

क्या 27 मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थी इमारत?

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद देश की प्रमुख धरोहरों में से एक कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित है. कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस मस्जिद का निर्माण कराया था. माना जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण 27 हिंदू एवं जैन मंदिरों को नष्ट करके किया गया था. इस मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फरवरी 2022 में साकेत कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि यहां मंदिरों को नष्ट किया गया है.

कुतुब मीनार परिसर में लौह स्तंभ किसने बनवाया

कुतुब मीनार परिसर में स्थित लौह स्तंभ (लोहे के खंभे) का इतिहास भी बहुत ही रोचक है. इस लौह स्तंभ का निर्माण चंद्रगुप्त द्वितीय ने 375 से 415 ईस्वी के दौरान कराया था. इस लौह स्तंभ की लंबाई 23.8 फीट है, जिनमें से 3.8 फीट जमीन के अंदर है. इस लौह स्तंभ का वजन 600 किलो से ज्यादा है.

 

Vikash Tiwari is an content writer with 3+ years of experience in the Education industry. He is a Commerce graduate and currently writes for the Current Affairs section of jagranjosh.com. He can be reached at vikash.tiwari@jagrannewmedia.com
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