सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2020 को नौसेना में महिला अधिकारियों के स्थाई कमिशन मामले पर फैसला सुना दिया है. कोर्ट के आदेश के अनुसार नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमिशन दिया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं और पुरुष अधिकारियों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए.
कोर्ट ने नौसेना में सेवा देने वाली महिला अधिकारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि महिलाएं अधिकारी भी पुरुष अधिकारियों की तरह काम कर सकती हैं. कोर्ट ने कहा कि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए.
केंद्र सरकार की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं पर लैंगिक आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें महिला अधिकारियों की शारीरिक सीमाओं का हवाला दिया गया था.
स्थाई कमीशन का मतलब क्या है?
स्थाई कमिशन का मतलब है कि कोई अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकता है और इसके बाद वह पेंशन का भी हकदार होगा. इसके तहत वे अधिकारी भी स्थयी कमिशन में जा सकती हैं जो अभी शॉर्ट सर्विस कमिशन में काम कर रही हैं.
शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत अधिकारियों को चौदह साल में रिटायर कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती है. इससे पहले महिलाएं केवल दस साल तक ही नौकरी कर पाती थीं.
शॉर्ट सर्विस कमिशन शुरू क्यों किया गया था?
सेना में अधिकारियों की कमी पूरी करने के लिए शॉर्ट सर्विस कमिशन शुरू किया गया था. इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही शामिल किया जाता था. लेकिन स्थाई कमिशन हेतु केवल पुरुष ही आवेदन कर सकते थे.
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी महीने में भारतीय सेना में महिला अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि मानसिकता बदली होगी. सुप्रीम कोर्ट ने ने कहा कि सेना में महिला अधिकारियों की नियुक्ति एक विकासवादी प्रक्रिया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए महिला अधिकारियों को सेना में स्थाई कमीशन पर मुहर लगा दी.
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