सर्वोच्च न्यायालय ने नोएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी गांव का भू अधिग्रहण निरस्त किए जाने के मामले में 12 जुलाई 2011 को निर्णय दिया कि बिल्डर उन आवेदकों को ब्याज समेत पैसा वापस करेंगे, जिन्होंने उनकी आवासीय योजनाओं में फ्लैट बुक कराए थे. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय में यह भी बताया कि अगर बिल्डर पैसा वापस करने से इनकार करते हैं तो फ्लैट आवेदक उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही को स्वतंत्र हैं.
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने ग्रेटर नोएडा अथारिटी, उत्तर प्रदेश सरकार व बिल्डरों की याचिकाएं खारिज करते हुए अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने फ्लैट आदि बुक कराने के लिए बिल्डर को पैसा दिया है वे बिल्डर से ब्याज सहित पैसा वापस पाने के अधिकारी हैं. बिल्डर पैसा वापस करने से इनकार करता है तो वे उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के लिए स्वतंत्र हैं.
ज्ञातव्य हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबेरी गांव का भू अधिग्रहण निरस्त करने के संबंध में 6 जुलाई को दिए संक्षिप्त आदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय को सही ठहराया था.
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