केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लगभग 343.99 करोड़ रूपये के 12 प्रस्तावों को 6 अगस्त 2013 को मंजूरी दी. यह मंजूरी विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की 5 जुलाई 2013 को हुई बैठक की सिफारिशों पर आधारित हैं.
इसके साथ ही माइलैन इंक के भारतीय फार्मा के 5168 करोड़ रुपये के अधिग्रहण के प्रस्ताव को औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) की संशोधित एफडीआई नीति आने तक रोक लिया गया. डीआईपीपी फार्मा कंपनी के खुद के विस्तार जिसमें नियंत्रण का स्थानांतरण शामिल है, के बारे में एफडीआई नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है.
विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने जिन प्रस्तावों को मंजूरी दी है उनमें सुच्यूर्स (आई) प्राइवेट लि का कंपनी में एफडीआई की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है. जिन अन्य एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है उनमें बीएनबी परिबा, टोटल प्रास्थेनिक्स एंड ऑन्थोटिक्स, इंपीरियल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च तथा लाइफ पाजिटिव का प्रस्ताव शामिल है.
इसके अलावा बोर्ड की बैठक में चार प्रस्तावों पर फैसला टाल दिया गया और तीन अन्य को खारिज कर दिया गया.
विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी)
विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े उन प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए एक सिगल विंडो का काम करता है जिन पर सीधे तौर पर एफडीआई की स्वीकृति नहीं होती. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों,अप्रवासी भारतियों तथा अन्य विदेशी निवेशकों के माध्यम से देश में निवेश की सुविधा प्रदान करके भारत तथा विदेश में निवेश संवर्धन कार्यकलापों की शुरूआत करके भारत में एफडीआई का संवर्धन करना है. एफआईपीबी में विभिन्न मंत्रालय के सचिवों के साथ-साथ आर्थिक मामलों के विभाग एवं वित्त मंत्रालय के सचिव अध्यक्ष के रूप में होते हैं. यह अंतरमंत्रालीय निकाय देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा, उच्चतम सीमा, कारकों पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के तहत करता है. वित्त मंत्रालय एफआईपीबी के अधिकतम 1200 करोड़ रुपए तक के प्रस्तावों पर की गई सिफारिशों को मंजूरी प्रदान करता है. ऐसे प्रस्तावों जिनका मूल्य 1200 करोड़ रुपए से अधिक होता है उनके लिए आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति की स्वीकृति लेनी होती है.
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