भारत के औषधि उद्योग को सस्ती दवाओं के आयात से बचाने तथा इस तरह के आयात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने यूरोपीय संघ से आयात की जाने वाली दवा ‘सेफाड्रॉक्सिल मोनोहाईड्रेट’ के भारी मात्रा में आयात पर 9 डॉलर प्रति किलो दर से पांच वर्षों के लिए एंटी-डंपिंग शुल्क लगा दिया है. इस संबंध में सीबीईसी की ओर से 17 अक्टूबर 2013 को अधिसूचना जारी की गयी.
केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी, Central Board of Excise and Customs, CBEC) ने यह एंटी-डंपिंग शुल्क केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के एंटी-डंपिंग एवं संबद्ध शुल्क निदेशालय (डीजीएडी) डीजीएडी की सुझावों के आधार पर लगाया है.
विदित हो कि मुंबई आधारित औषधि निर्माण कंपनी लुपिन फार्मा ने डीजीएडी को यूरोपीय संघ से आयातित औषधियों से घरेलू फार्मा उद्योग को रही हानियों से अवगत कराया था. जिसके पश्चात डीजीएडी ने हाल ही में यूरोपीय संघ से आयातित की जाने वाली उऩ औषधियों का सर्वेक्षण किया था जिनसे घरेलू उद्योगों को हानि पहुंचा रही है.
वे सभी देश, जिनके घरेलू उद्योगों को सस्ती आयातित वस्तुओं के आयात से नुकसान पहुंचता है, एंटी-डंपिंग के अंतर्गत शुल्क लगाती हैं जो कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप है.
सेफाड्रॉक्सिल मोनोहाईड्रेट (Cefadroxil Monohydrate)
सेफाड्रॉक्सिल मोनोहाईड्रेट एक सक्रिय औषधि अवयव है जिसका उपयोग बहुत सी दवाओं के फॉर्मूलेशन में किया जाता है.
एंटी-डंपिंग एवं संबद्ध शुल्क निदेशालय (डीजीएडी, Directorate General of Anti-Dumping & Allied Duties, DGAD)
एंटी-डंपिंग एवं संबद्ध शुल्क निदेशालय केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय का एंटी-डंपिंग और संबंद्ध शुल्क से संबंधित निदेशालय है जो कि उन सभी मामलों में एंटी-डंपिंग शुल्क से संबंधित अन्वेषण तथा एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने संबंधी सुझाव देता है जिनसे घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंच रहा हो.
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