मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव ने 25 फरवरी 2015 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा. राम नरेश यादव ने मध्य प्रदेश से जुड़े ‘व्यापमं घोटाले’ में शामिल होने के आरोप के बीच इस्तीफा दिया.
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने कई धाराओं में राज्यपाल नरेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. इनमें धोखाधड़ी की धारा 420 भी शामिल है. उनपर आरोप हैं कि उन्होंने वन सुरक्षाकर्मियों के रूप में तैनाती के लिए पांच उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश व्यापमं के शीर्ष अफसरों से की थी. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 20 फरवरी को इस मामले की हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एमए खानविलकर और न्यायाधीश आलोक अराधे ने कहा कि एसटीएफ राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आजाद है, जिसके बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. राज्यपाल यादव के बेटे का नाम भी इस घोटाले में सामने आया.
विदित हो मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) पर अनुचित तरीके से अयोग्य लोगों को भर्ती कराने के आरोप लगे हैं.
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