मालदीव राष्ट्र ने 1 जुलाई 2015 को क्योटो प्रोटोकॉल के दोहा संशोधन को अपनी स्वीकृति प्रदान की.
विदित हो वर्ष 2012 में दोहा के राजधानी कतर में आयोजित किए गए ‘कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज’ सम्मेलन में यूएनएनएफसी के सभी सदस्य क्योटो प्रोटोकॉल में संशोधन करने के लिए सहमत हुए थे. इसे ही दोहा संशोधन का नाम दिया गया.
अब तक 35 दलों ने क्योटो प्रोटोकॉल के लक्ष्य को प्राप्त करने की समय सीमा में विस्तार की योजना को स्वीकार किया है जबकी अब भी 144 दलों को इस विस्तार को स्वीकृत करना बाकी है.
क्योटो प्रोटोकॉल 11 दिसंबर 1997 जापान के शहर क्योटो में अपनाया गया जिसे 16 फरवरी 2005 को लागू किया गया.
प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत नियम, 2001 मार्केश, मोरक्को में आयोजित ‘कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज7’ सम्मेलन में अपनाया गया.
विदित हो क्योटो प्रोटोकॉल की प्रथम अवधि 2008 से 2012 तक निर्धारित की गई थी.
दोहा संशोधन
यूएनएनएफसी के सदस्यों द्वारा 8 दिसंबर 2012 को क्योटो प्रोटोकॉल में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई.
संशोधन के अंतर्गत निम्नलिखित तथ्यों को शामिल किया गया है –
• 1 जनवरी 2013 से 31 दिसंबर 2020 को ने अवधि के रूप में स्वीकृत किया गया.
• इस अवधी के दौरान ग्रीन हाउस गैसों की संशोधित सूची प्रस्तुत करनी होगी.
पहली प्रतिबद्धता अवधि और दूसरी प्रतिबद्धता अवधि में अंतर –
पहली प्रतिबद्धता अवधि के तहत 37 औद्योगिक देश और यूरोपीय समुदाय 2008 से 2012 की अवधि के दौरान ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को 1990 के स्तर से औसतन पांच प्रतिशत कम करने के लिए प्रतिबद्ध थे.
जबकी द्वितीय प्रतिबद्धता अवधि में 2013 से 2020 के दौरान 1990 के स्तर से औसतन 18 गैस के उत्सर्जन को प्रतिशत कम करने के लिए प्रतिबद्ध हुए.
भविष्य का प्रोटोकॉल जलवायु के प्रति विभिन्न राष्ट्रों का योगदान के सिद्धांत पर आधारित होगा जिसके तहत सभी देशों को सार्वजनिक रूप से यह बताना होगा की वह वर्ष 2020 के बाद जलवायु को स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाएंगे.
इस प्रोटोकॉल की दिसंबर 2015 में 'कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज-21’ के पेरिस सम्मेलन में आने की सम्भावना है.
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