मुस्तफा कमाल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अध्यक्ष पद से 1 अप्रैल 2015 को इस्तीफा दे दिया. उन्होंने भारत-बांग्लादेश क्वार्टर फाइनल मुकाबले के बाद सार्वजनिक तौर पर मैच में अंपायरिंग के स्तर की निंदा की थी, जिसके बाद आईसीसी ने अपने ही अध्यक्ष की आलोचना की थी.
हेडलाइंस टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत में मुस्तफा कमाल था ने कहा, 'कई फैसले बांग्लादेश के खिलाफ गए. अगर अंपायरों ने जानबूझकर ऐसा किया तो यह क्रिकेट के खिलाफ जुर्म है.'
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विवाद क्या था?
आईसीसी क्रिकेट विश्व कप-2015 के क्वार्टर फाइनल में भारतीय टीम ने बांग्लादेश को पराजित कर दिया था. इस मैच में अंपायरों द्वारा लिए गए निर्णय की आलोचना हुई थी. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तो यहां तक कह दिया कि भारत ने यह मैच अंपायर्स की मदद से जीता.
विवाद पाकिस्तानी अंपायर अलीम डार द्वारा भारतीय बल्लेबाज रोहित शर्मा को 90 के स्कोर पर नॉट आउट देने को लेकर था. रोहित शर्मा ने जो शॉट खेला, वह सीधे फील्डर के हाथ में गया. हालांकि अंपायर अलीम डार ने बॉल को कमर की हाईट से ऊपर बताते हुए नो बॉल करार दिया. इसके अलावा शिखर धवन द्वारा बाउंड्री लाइन पर पकड़े गए एक कैच को लेकर भी विवाद था. इस मामले में निर्णय टीवी अंपायर ने दिया था.
मुस्तफा कमाल से संबंधित मुख्य तथ्य
• मुस्तफा कमाल बांग्लादेश के राजनीतिज्ञ एवं क्रिकेट अधिकारी हैं.
• वह चटगांव डिवीजन के कोमिला-10 (Comilla-10) निर्वाचन क्षेत्र से जातीय संसद (बांग्लादेश संसद) के सदस्य हैं.
• मुस्तफा कमाल बांग्लादेश आवामी लीग (Bangladesh Awami League) के संयोजक हैं.
• वह वर्ष 2010-12 के मध्य एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष रहे.
• वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की लेखा परीक्षा समिति के अध्यक्ष रहे.
• मुस्तफा कमाल को वर्ष 2012-2014 के कार्यकाल के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का उपाध्यक्ष नामित किया गया.
• आईसीसी के लिए अपना नामांकन करने से पहले मुस्तफा कमाल बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष थे.
• मुस्तफा कमाल को वर्ष 2014 में आईसीसी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. उन्होंने एलन आइजैक का स्थान लिया.
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