वैज्ञानिकों ने आवर्त सारणी के 117वें तत्व के अस्तित्व की पुष्टि की

May 7, 2014, 18:43 IST

बर्लिन में वैज्ञानिकों के एक समूह ने 5 मई 2014 को रासायनिक आवर्त सारणी के 117वें तत्व के अस्तित्व की पुष्टि की.

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में वैज्ञानिकों के एक समूह ने 5 मई 2014 को रासायनिक आवर्त सारणी के 117वें तत्व के अस्तित्व की पुष्टि की.
भारत समेत 11 देशों के अनुसंधानकर्ताओं के एक समूह ने जर्मनी की जीएसआई ऐक्सलेरेटर प्रयोगशाला में तत्व 117 के परमाणु का सृजन किया, जो अब तक अवलोकित सबसे भारी परमाणु से मेल खाता है. यह तत्व सीसा के एक परमाणु से 40 गुना ज्यादा वजनी है.

यह प्रयोग रसायनशास्त्रियों और भौतिकशास्त्रियों के एक दल ने किया, जिसका नेतृत्व एसजीआई जोहानेस गुटेनबर्ग युनिवर्सिटी मैंज (जेजीयू) के प्रोफेसर क्रि स्टोफ डलमान ने किया. इस दल में आस्ट्रेलिया, फिनलैंड, भारत, जापान, नाव्रे, पोलैंड, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के 16 संस्थानों के 72 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने हिस्सा लिया.

उल्लेखनीय है कि परमाणु संख्या 104 के बाद के रासायनिक तत्वों को अत्यंत भारी तत्व कहा जाता है. अत्यंत भारी तत्व प्रकृति में नहीं पाए जाते हैं. उन्हें सर्वाधिक भारी लक्ष्य केंद्रकों पर अन्य तत्वों के केंद्रकों के  तेज रफ्तार प्रहार कर सृजित किया जाता है.

आवर्त सारणी से संबंधित मुख्य तथ्य

तत्वों की आवर्त सारणी, रासायनिक तत्वों को उनकी संगत विशेषताओं के साथ एक सारणी के रूप में दर्शाने की एक व्यवस्था है. वर्तमान आवर्त सारणी में अब 117 ज्ञात तत्व  सम्मिलित हैं. रूसी रसायन शास्त्री मेंडलीफ/मेन्देलेयेव ने वर्ष 1861 में आवर्त सारणी नियम प्रस्तुत किया.

मेंडलीफ/मेन्देलेयेव के अनुसार,"तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्तफलन होते हैं." अर्थात यदि तत्वों को परमाणु भार के वृद्धिक्रम में रखा जाय तो वो तत्व जिनके गुण समान होते हैं, एक निश्चित क्रम के बाद आते हैं. मेंडलीव ने इस सारणी के सहारे तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आवर्ती होने के पहलू को प्रदर्शित करने का प्रयत्न किया था. वर्ष 1815 से 1913 तक आवर्त सारणी में बहुत से सुधार हुए ताकि नये आविष्कृत तत्वों को उचित स्थान दिया जा सके और सारणी नयी जानकारियों के अनुरूप हो.
रसायन शास्त्रियों के लिये आवर्त सारणी अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है. इसके कारण कम तत्वों के गुणधर्मों को ही याद रखने से रासायनिक क्रिया-कलाप संबधी काम हो जाता है, क्योंकि आवर्त सारणी में किसी समूह (उर्ध्वाधर पंक्ति) या किसी आवर्त (क्षैतिज पंक्ति) में गुणधर्म एक निश्चित क्रम से एवं तर्क संगत तरीके से बदलते हैं.


विदित हो कि मैंडलीफ की आवर्त सारणी में कुल 8 वर्ग थे क्योंकि उस समय निष्क्रिय गैसों की खोज नहीं हुई थी. बाद में निष्क्रिय गैसों की खोज के पश्चात आधुनिक आवर्त सारणी में 9वें वर्ग को शामिल किया गया. इस 9वें वर्ग को 0 (शून्य वर्ग) कहते हैं. एक से आठवें वर्ग को रोमन अक्षर I, II, III, IV, V, VI, VII तथा VIII द्वारा प्रदर्शित किया जाता है वहीं नवें वर्ग को ० द्वारा प्रदर्शित किया जाता है. मेंडेलिव के बाद के वैज्ञानिकों राग, वर्नर, बोहर और बरी आदि ने मेंडेलिव की आवर्त सारणी में उपस्थित श्रेणियों को खत्म कर दिया तथा वर्गो की संख्या को 9 से बढ़ाकर 18 कर दिया.

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