केंद्र सरकार ने कृषि एवं ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-2015, 19 मई 2015 को जारी किया. इस सूचकांक के अनुसार, कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (आधार वर्ष 1986-87=100) मार्च, 2015 में 803 अंक पर स्थिर रहा. वहीं, दूसरी और ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य= सूचकांक मार्च, 2015 के दौरान 1 अंक बढ़कर 807 अंक हो गया.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-2015 से संबंधित मुख्य तथ्य:
• अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि/कमी विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रही. कृषि श्रमिकों के मामले में इस सूचकांक में 1 से लेकर 9 अंकों की वृद्धि 13 राज्यों में दर्ज की गई. इस सूचकांक में 1 से लेकर 6 अंकों की कमी सात राज्यों में देखने को मिली. हरियाणा 902 अंकों के साथ इस तालिका में सबसे ऊपर रहा, जबकि हिमाचल प्रदेश 664 अंकों के सूचकांक के साथ इस तालिका में सबसे नीचे रहा.
• ग्रामीण श्रमिकों के मामले में अखिल भारतीय उपभोक्तां मूल्य सूचकांक में 1 से लेकर 10 अंकों की बढ़ोतरी 13 राज्यों में दर्ज की गई, जबकि इसमें 1 से लेकर 6 अंकों की कमी 7 राज्यों में देखने को मिली. हरियाणा 898 अंकों के साथ इस सूचकांक तालिका में सबसे ऊपर रहा, जबकि हिमाचल प्रदेश 695 अंकों के साथ इस सूचकांक तालिका में सबसे नीचे रहा.
• कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 6-6 अंकों की सर्वाधिक कमी दशाई. इसी तरह ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 6 अंकों की सर्वाधिक कमी पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई.
• चावल, गेहूं के आटे, प्याज और फल-सब्जियों की कीमतें घटने से ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में इस हद तक कमी दर्ज की गई. कृषि श्रमिकों (एएल) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ने 9 अंकों की सर्वाधिक वृद्धि त्रिपुरा राज्य में दशाई. इसी तरह ग्रामीण श्रमिकों (आरएल) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 10 अंकों की सर्वाधिक बढ़ोतरी जम्मू-कश्मीर में दर्ज की गई.
• मक्का, ब्रेड, दालों, मांस, फल-सब्जियों और बुने हुए ऊनी परिधानों की कीमतें बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में वृद्धि दर्ज की गई.

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