भारत में किस व्यक्ति को कहा जाता है ‘Ice Man of India’, जानें नाम और कारण
भारत के एक व्यक्ति ऐसे भी हैं, जिन्हें ‘Ice Man of India’ के नाम से भी जाना जाता है। यह लद्दाख के एक सिविल इंजीनियर हैं और पानी किल्लत दूर करने के लिए जाने जाते हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
भारत में आपने बहुत-से व्यक्तियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, इनमें से एक व्यक्ति ऐसे भी हैं, जिन्हें ‘Ice Man of India’ के नाम से भी जाना जाता है। यह हैं चेवांग नोरफेल, जो कि लद्दाख के एक सिविल इंजीनियर हैं।
इन्होंने अपनी सोच और इंजीनियरिंग कौशल से रेगिस्तानी और सूखे पहाड़ी इलाकों में पानी की परेशानी को दूर करने के लिए 'कृत्रिम ग्लेशियर' बनाने की तकनीक को विकसित किया था। इस लेख में हम उनके द्वारा किये गए कार्य और उनके बारे में विस्तार से जानेंगे।
साधारण परिवार में जन्मे थे चेवांग
चेवांग का जन्म 1935 में लद्दाख के लेह में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और इसके बाद लद्दाख में ग्रामीण विकास विभाग में सिविल ओवरसियर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि लद्दाख में पानी की किल्लत बहुत अधिक हो गई है, उन्होंने इसका समाधान निकालने का निर्णय लिया।
कैसे आया कृत्रिम ग्लेशियर बनाने का विचार?
लद्दाख में खेती पूरी तरह से ग्लेशियरों के पानी पर निर्भर करती है, लेकिन ग्लेशियर के समय पर न पिघलने की वजह से किसानों को खेती में परेशानी होती थी। ऐसे में चेवांग ने इसका समाधान निकालते हुए कृत्रिम ग्लेशियर बनाने का निर्णय लिया।
कैसे बनाया कृत्रिम ग्लेशियर
चेवांग ने कृत्रिम ग्लेशियर बनाने के लिए इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया। वह सर्दी के मौसम में बहकर आने वाले पानी का रूख मोड़ देते थे। इस पानी को पहाड़ों के निचले हिस्सों में बनाए गए पत्थरों के छोटे बांधों की तरफ डायवर्ट किया जाता था। पानी की गति कम होने और अधिक सर्दी होने की वजह से यह पानी जम जाता था। वहीं, कृत्रिम ग्लेशियर प्राकृतिक ग्लेशियर की तुलना में बहुत कम ऊंचाई पर होते हैं, ऐसे में यह अप्रैल-मई में ही पिघलना शुरू कर देते थे। इससे किसानों को बुवाई के समय पानी मिल जाता था।
17 से अधिक कृत्रिम ग्लेशियर का किया निर्माण
चेवांग ने सिर्फ अपने गांव में नहीं, बल्कि विभिन्न गावों में पहुंच 17 से अधिक कृत्रिम ग्लेशियरों का निर्माण किया। उन्होंने ‘फुकत्से’ गांव में 4,000 फीट लंबा ग्लेशियर बनाया था, जिससे पूरे गांव में खेती हो जाती थी। साल 2015 में उन्हें भारत सरकार ने ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया। वहीं, उन्हें ग्रामीण विकास के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार भी मिला है।
क्यों जरूरी है यह लेख
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