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Surya Grahan 2022:जानें देश में ऐसे कौन-कौन से मंदिर हैं जिनके पट ग्रहण काल में भी रहते हैं खुले

देश में आज इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण दिखाई देगा. ग्रहण के दौरान देश के अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं देश में ऐसे भी कई मंदिर हैं जहाँ ग्रहण के दौरान पट खुले होते हैं और इन मंदिरों में ग्रहण का प्रभाव भी शून्य माना जाता है, आइये जानें देश में ऐसे कौन-कौन से मंदिर हैं.  

Surya Grahan 2022
Surya Grahan 2022

देश में आज इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण दिखाई देगा. ये सूर्य ग्रहण देश में आंशिक रूप से दिखाई देगा. हिन्दू धर्म में  ग्रहण के दौरान बहुत से धार्मिक और अन्य कार्य प्रतिबंधित होते हैं. जैसे मूर्ति पूजन, मंदिर जाना, भोजन करना, आदि इस दौरान देश के अधिकांश मंदिरों के पट भी बंद रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं देश में कई ऐसे भी मंदिर हैं जहाँ ग्रहण के दौरान मंदिर के पट बंद नहीं किये जाते हैं बल्कि इन मंदिरों के पट ग्रहण के दौरान विशेष रूप से खुलते हैं. आइये जानें आखिर देश में ऐसे कौन-कौन से मंदिर हैं?

1. महाकाल, उज्जैन 
उज्जैन में स्थित महाकाल मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. इस मंदिर के पट ग्रहण काल के दौरान कभी भी बंद नहीं किये जाते हैं. हालाकिं ग्रहण के दौरान शिवलिंग को स्पर्श करने और भोग लगाना वर्जित है. यहाँ ऐसी मान्यता है कि, महाकाल कालों के काल हैं और उनपर ग्रहण का कोई असर नहीं होता है इस लिए इसके पट बंद नहीं किये जाते हैं. इस दौरान भक्तों के दर्शन भी बंद नहीं होते हैं, लेकिन गर्भ ग्रह में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होता है जबकि पंडित और पुरोहित मंदिर के गर्भ गृह में भी प्रवेश कर सकते हैं. कुल मिलाकर कुछ परिवर्तनों के साथ मंदिर खुला रहता है. 

2. गोवर्धन नाथ जी की हवेली, झाबुआ 
ये मंदिर भगवान श्री कृष्णा के बाल रूप को समर्पित है इस मंदिर के लिए ऐसी मान्यता है कि, यहाँ भगवान के बाल रूप होने के कारण उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता है इसलिए इस मंदिर के पट ग्रहण काल में भी खुले रहते हैं. इस दौरान भगवान को काले वस्त्र पहनाये जाते हैं. और ग्रहण के दौरान भक्त श्री गोवर्धन नाथ जी की हवेली में आकर भजन और कीर्तन कर सकते हैं. 

3. कालहटेश्‍वर मंदिर, दक्षिण भारत 
ग्रहण के दौरान जहाँ अधिकतर मंदिरों के पट बंद होते हैं वही देश में एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ ग्रहण के दौरान पूजा भी होती है ये मंदिर है दक्षिण भारत के कैलाष्ठी में स्थित कालहटेश्‍वर मंदिर. ये मंदिर राहु और केतु को समर्पित है इस कारण इसके पट ग्रहण के दौरान भी बंद नहीं किये जाते हैं. ये विश्व का इकलौता राहु और केतु को समर्पित मंदिर है. इस मंदिर में राहु केतु के साथ ही काल सर्प दोष पूजा ही होती है.

4. श्रीनाथ जी मंदिर, नाथद्वारा
राजस्थान स्थित श्रीनाथद्वारा मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण के ही स्वरूप श्री नाथ जी को समर्पित है ग्रहण के दौरान इस मंदिर के पट कभी भी बंद नहीं किये जाते हैं और इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहाँ आकर मंदिर की परिक्रमा और पूजा पाठ करते हैं.         
  
5. द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा 
जहाँ मथुरा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री कृष्ण जन्म भूमि, श्री रंगनाथ जी, बांके बिहारी मंदिर ग्रहण काल के दौरान बंद रहेंगे और कई घंटों बाद ही खुलेंगे वहीं मथुरा में स्थित प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर के पट ग्रहण के दौरान भी खुले रहेंगे और भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे. ये मंदिर पुष्टि मार्ग संप्रदाय को समर्पित है. इस दौरान भक्त भगवान के सामने बैठकर भजन कीर्तन भी कर सकेंगे.