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COP 27: क्लाइमेट चेंज पर COP-27 कांफ्रेंस मिस्र में शुरू, जानें क्या है भारत का एजेंडा?

COP 27: क्लाइमेट चेंज पर यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पार्टीज का 27वां कांफ्रेंस मिस्र में 6 नवंबर 2022 से शुरू हुआ. यह कांफ्रेंस 6 से 18 नवंबर 2022 तक मिस्र की कोस्टल सिटी शर्म अल-शेख में आयोजित की जा रही है. जानें क्या है भारत का एजेंडा?

क्लाइमेट चेंज पर COP-27 कांफ्रेंस मिस्र में शुरू
क्लाइमेट चेंज पर COP-27 कांफ्रेंस मिस्र में शुरू

COP 27: क्लाइमेट चेंज पर यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पार्टीज का 27वां कांफ्रेंस मिस्र में 6 नवंबर 2022 से शुरू हुआ. यह कांफ्रेंस 6 से 18 नवंबर 2022 तक मिस्र की कोस्टल सिटी शर्म अल-शेख (Sharm el-Sheikh) में आयोजित की जा रही है. क्लाइमेट एक्शन पर यह एक सबसे बड़ी ऐन्यूअल मीटिंग है.

इस कांफ्रेंस में भारत सहित दुनिया भर के देशों के हेड ऑफ़ स्टेट, मिनिस्टर, क्लाइमेट एक्टिविस्ट, सिविल सोसायटी रिप्रेजेन्टेटिव आदि भाग ले रहे है. भारत की ओर से पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव cop-27 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे है.

मिस्र में क्यों आयोजित हो रहा COP-27?

इसका आयोजन अफ्रीकन कॉन्टिनेंट में इस कारण से भी किया जा रहा है कि अफ्रीकन कॉन्टिनेंट पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सके. यह पाचवां मौका है जब COP का आयोजन इस कॉन्टिनेंट में किया जा रहा है.

जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतर - सरकारी पैनल (IPCC) का कहना है कि अफ्रीकन कॉन्टिनेंट दुनिया के सबसे कमजोर क्षेत्रों में से एक है. वर्तमान में, सूखे के कारण इस्टर्न अफ्रीका में लगभग दो करोड़ लोगों के खाद्य असुरक्षा का सामना करने का अनुमान है. हालांकि, मिस्र में आयोजन को लेकर कुछ मानवाधिकार और क्लाइमेट एक्टिविस्ट का कहना है कि सरकार की आलोचना के कारण उन्हें इसमें भाग लेने से रोका गया है. 

किन मुद्दों पर है मेंन फोकस? 

  • इमिशन को कम करना: 27वें कांफ्रेंस का मुख्य फोकस ग्लोबल इमिशन को कम करना है, साथ ही इमिशन को कम करने के उपायों पर भी चर्चा की जायेगी. इमिशन को कम करने में डेवलप्ड कंट्रीज का रोल अहम् हो जाता है, इसलिए उनकी तरफ से ठोस और निर्णायक कदम उठाने की जरुरत है.
  • क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर सहयोग: क्लाइमेट चेंज की तैयारियों और इसके समाधान के लिए आपसी सहयोग पर चर्चा की जायेगी. क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टीज के मध्य विचारों और इसके उपायों का आदान-प्रदान किया जायेगा जिससे भविष्य में आने वाली चुनौतियों का एक स्थायी हल निकाला जा सके.
  • विकासशील देशों की मदद: क्लाइमेट चेंज और एनवायरनमेंट के मुद्दे पर, विकासशील देशों की मदद के लिए तकनीकी सहायता और फाइनेंसियल सपोर्ट को शुनिश्चित किया जा सके. वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए डेवलपिंग कंट्रीज को काफी मदद की आवश्यकता है. COP जैसे प्लेटफार्म से की गयी पहल डेवलपिंग कंट्रीज को क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा.    
  • ग्लोबल कार्बन मार्केट: ग्लोबल लेवल पर प्रोडक्ट और सर्विसेज में इमिशन के प्रभाव का सही मूल्य निर्धारण करने की आवश्यकता है. जिससे विभिन्न देशों को क्लाइमेट चेंज के प्रभावों से उबरने में मदद की जा सके. साथ ही कोयले के उपयोग को कम करने के उपायों पर भी चर्चा की जाने की उम्मीद है.
  • साथ ही COP-25 और COP-26 में जिन मुद्दों पर सहमती नहीं बन पाई थी उन मुद्दों का भी एक बेहतर हल निकालने की कोशिश की जाएगी. 2015 के पेरिस समझौते के तहत दुनिया के सभी देश पहली बार ग्लोबल वार्मिंग से निपटने और ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन में कटौती पर सहमत हुए थे.

COP-27 में क्या है भारत का एजेंडा? 

भारत COP-27 में प्रमुखता से भाग ले रहा है, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के लीडरशिप में भारतीय प्रतिनिधिमंडल मिस्र गया हुआ है. भारत अपने एजेंडे में मुख्य रूप से इन बातोँ को प्रमुखता दे रहा है-

  • भारत क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर डोमेस्टिक एक्शन और मल्टीलेटरल कोऑपरेशन के लिए प्रतिबद्ध है.
  • भारत क्लाइमेट फाइनेंस से जुड़ी डिबेट और इसकी क्लियर पारदर्शिता को बढ़ावा देने और क्लाइमेट फाइनेंस को आगे ले जाने में सहयोग देने के लिए तैयार है. 
    साथ ही भारत अपने एजेंडे में इस बात को शामिल किया है कि क्लाइमेट फाइनेंस के मुद्दे पर यूएनएफसीसीसी के फाइनेंसियल सिस्टम को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है.
  • भारत मिशन लाइफ (Mission LiFE) से विश्व के देशो को जुड़ने के लिए आमन्त्रित करेगा. पीएम मोदी ने वर्ष 2021 में ग्लासगो में COP-26 में मिशन लाइफ की अवधारणा को पेश किया था.

COP-27 में इंडिया पवेलियन का उद्घाटन:   

केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने COP-27 में इंडिया पवेलियन का उद्घाटन किया. इंडिया पवेलियन का थीम लाइफ-लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE- Lifestyle for Environment) है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इसके उद्घाटन अवसर पर कहा कि भारत समस्या नहीं समाधान का हिस्सा है.

COP क्या है?

COP का अर्थ है कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज, इस समिट में वे देश भाग लेते है, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) पर हस्ताक्षर किए है.  UNFCCC एक संधि है जिसे वर्ष 1994 में लागू किया गया था. 

यह 27वां सम्मेलन है. COP27 के अध्यक्ष, मिस्र के विदेश मंत्री समेह शौकरी (Sameh Shoukry) है. 26वां COP शिखर सम्मेलन ब्रिटेन और इटली की मेजबानी में आयोजित किया गया था. सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री आलोक शर्मा थे.

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