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कॉलेज छात्रों के लिए जरुरी 8 सॉफ्ट स्किल्स

Feb 8, 2018 17:35 IST
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8 Soft Skills Every College Student Should Possess
8 Soft Skills Every College Student Should Possess

गणितीय फ़ार्मुलों और वैज्ञानिक अवधारणाओं के ज्ञान जैसे कठिन स्किल्स में महारत हासिल करना शिक्षकों और नियोक्ताओं के मन में हमेशा आपकी एक अच्छी छवि बनाता है लेकिन आज कल सॉफ्ट स्किल्स को लेकर शिक्षक और नियोक्ता दोनों सजग हो चुके हैं तथा इसे एक आवश्यक स्किल के रूप में देख रहें हैं.

आज के समय में सॉफ्ट स्किल सफलता का पर्याय बन चूका है. विषय विशेषज्ञ होने केवावजूद भी अगर आपके पास कुशल संचार शैली (Good Communication skill) नहीं है तो आपकी सफलता संदेह के घेरे में है. यह स्किल आपको सीखने के साथ साथ बेहतर जीवन जीने की कला सिखाती है. कॉलेज और पेशेवर जीवन के अतिरिक्त जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हेतु सॉफ्ट स्किल की  आवश्यक्ता होती है. कॉलेज के बाद एक पेशेवर के रूप में अपनी जिंदगी व्यवस्थित रूप से जीने तथा व्यावसायिक सफलता के लिए आपके पास कुशल संचार शक्ति होनी चाहिए. इसके समुचित ज्ञान से  आप अपने व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक दोनों ही क्षेत्रों में सामंजस्य स्थापित करते हुए सफलता हासिल कर सकते हैं.
आगे कुछ सॉफ्ट स्किल्स की सूची दी गयी है जिसकी जानकरी प्रत्येक कॉलेज छात्र को होनी चाहिए -

टीम वर्क- सामूहिक स्तर पर किसी कार्य को करने तथा उसमें वांछित परिणाम हेतु कॉलेज छात्रों में टीम वर्क करने की क्षमता होनी चाहिए. किस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए हमें कई समूहों के साथ मिलकर संयुक्त प्रयास करना पड़ता है. सहयोग और टीमवर्क न केवल सेल्फ परफोर्मेंस को बढ़ाता है बल्कि टीम को उसके लक्ष्य तक पहुंचने में भी सहायता करता है. व्यक्तिगत प्रयासों से सामूहिक सफलता पाना मुश्किल होता है. अतः टीम वर्क की कला में प्रवीण होना जरुरी है.  

इसमें सुधार के उपाय- इस गुणवत्ता को बढ़ाने का सर्वोत्तम तरीका खेल और अन्य समूह की गतिविधियों में भाग लेना है

समस्याओं का समाधान– कॉलेज में अध्ययन के लिए घर छोड़ने के कारण आपको शुरूआती दौर में बहुत सारी समस्यायों का सामना करना पड़ेगा. आपको सतर्क रहते हुए इन समस्याओं का हल खुद ही ढूँढना चाहिए. इसके लिए यह बहुत जरुरी है कि आप धैर्य के साथ अपनी समस्याओं का समाधान तलाशें और तब तक कोशिश में लगे रहें जब तक कि आपकी समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती.

इसमें सुधार के उपाय– हालात से समझौता करते हुए अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर नई चुनौतियों का सामना करें.

नेतृत्व क्षमता– आवश्यक्ता अनुरूप नियंत्रण क्षमता का प्रदर्शन भी जरुरी होता है. एक पेशेवर में  टीम प्लेयर होने के साथ साथ नेतृत्व क्षमता भी होनी चाहिए ताकि समय पड़ने पर वो किसी समूह या  संस्था का नेतृत्व कर सके. व्यावसायिक दृष्टिकोण से कंपनिया एक नेतृत्व संपन्न व्यक्ति का ही चयन करती है ताकि कंपनी के विजन और मिशन को प्राप्त करने की दिशा में सही दिशा निर्देश दे सके.

समें सुधार के उपाय– कॉलेज, विभाग या सोसायटी यूनियनों में चुनाव के लिए खड़े होने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आपके नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी.

पारस्परिक कौशल- सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण अब एक दूसरे से वार्तालाप कर विचार साझा करने की प्रक्रिया अब अपना वो प्रभाव नहीं छोड़ती जो अरसों पहले छोड़ा करती थी बहुत सारे लोग अभी भी सोशल मीडिया पर अपने मैसेज को किस प्रकार प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित  करना है नहीं जानते. इसमें दक्षता हासिल कर आप एक पब्लिक फिगर बन सकते हैं.

इसमें सुधार के उपाय– विचार प्रेषण की सही एवं प्रभावशाली प्रक्रिया की जानकारी हेतु अपने प्रोफेसरों से कक्षा समाप्ति के बाद बात करें. ग्रीष्म / सर्दियों के ब्रेक के दौरान आप एक पेशेवर इंटर्नशिप भी कर सकते हैं.

रचनात्मकता- आज के युग में खासकर पेशेवर जगत में सिर्फ रचनात्मक विचारों से लवरेज होना ही काफी नहीं है बल्कि उसका सही प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया भी आपको आनी चाहिए. आपके पास नए विचारों का होना उतना मायने नहीं रखता जितना कि उन विचारों को सही समय पर सही ढंग से प्रस्तुत करना मायने रखता. आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में सफलता के लिए आपको रचनात्मक होने के साथ साथ समय की नजाकत को समझते हुए अपने विचारों को दूसरों के सामने सही रूप में प्रस्तुत करने और अपने सीनियर को संतुष्ट करने की कला में माहिर होना होगा. रचनात्मकता की प्रवृति कमोवेश प्रत्येक मनुष्य में पाई जाती है. अतः अपने इस गुण में अपने सशक्त भाषा और आकर्षक संवाद शैली से आप  और निखार ला सकते हैं.

इसमें सुधार के उपाय– अपनी डिजाइन या लेखन क्षमता के आधार पर अपने या फिर अन्य कॉलेजों के प्रतियोगिता में भाग लें. इससे आपके रचनात्मक प्रवृति का निरंतर विकास होगा.

समय प्रबंधन– जीवन को सुचारू रूप से गतिशील करने तथा वांछित सफलता प्राप्ति के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम करना और समय के समुचित प्रबंधन की कला आनी चाहिए. लेकिन आप जब एक छात्र के रूप में स्कूल से निकलकर एक कॉलेज में दाखिला लेते हैं उस समय अपना शिड्यूल खुद निर्धारित करने के कारण आपके लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है. कॉलेज जीवन में एकेडमिक और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविज आदि बहुविध गतिविधियों को एक साथ करने के लिए आपको उचित समय प्रबन्धन और कार्यों की प्राथमिकता पर जोर देना होगा.

इसमें सुधार के उपाय– कहते हैं आवश्यक्ता ही आविष्कार की जननी है. आपकी आवश्यक्ताएं ही आपको समय प्रबन्धन की कला में मास्टर बना देंगीं. व्यस्त दिनचर्या में कैसे काम किया जाता है यह जानने के लिए विभिन्न प्रकार की स्वयंसेवी गतिविधियों और कार्यक्रमों में भाग लें.

दूरगामी सोंच और विश्लेष्णात्मक क्षमता- किसी भी विषय पर निर्णय लेने के लिए विचारों तथा मुद्दों का विश्लेषण, उसका दूरगामी प्रभाव आदि की समुचित जानकरी होना आवश्यक है. इसके लिए गहरी चिंतन क्षमता होनी चाहिए तभी आप मुद्दों और विषयों की प्रासंगिकता को समझ पाएंगे. किसी भी आवश्यक परिवर्तन से पहले उसके विषय में अत्यधिक विचार विमर्श सहित चिंतन किया जाना चाहिए तभी उसका परिणाम अत्यधिक लोगों के हित में होगा. उदाहरण के लिए हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले ग्लोबल वार्मिंग और गरीबी जैसे मुद्दों से जुड़े निर्णय सामज में क्रांतिकारी परिवर्तन लायेंगे. अतः कोई भी निर्णय लेने से पहले उस पर खूब विचार मंथन करना चाहिए. आपकी सही सोच ही इस दुनिया को एक बेहतर दुनिया बना सकती है. गहन सोंच की क्षमता से आप जीवन में हमेशा सही निर्णय लेने में सक्षम होंगे.

इसमें सुधार के उपाय– आपकी रोजमर्रे की जिंदगी और जीवन शैली से यह स्पष्ट पता चलता है कि आप किसी भी घटना या मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं ? हमेशा आपनी बुनियादी आवश्यक्ताओं पर ध्यान दें और मानसिक स्वस्थ्य प्रक्रिया के प्रति सचेत रहें.

सामंजस्य क्षमता– आप हमेशा अपने समान विचार वाले लोगों से नहीं मिल सकते. इस बहुविध दुनिया में भिन्न भिन्न विचार के लोग आपसे मिलेंगे. इसलिए जीवन और समाज में संतुलन बनाये रखने के लिए आपको सबके साथ सामंजस्य बैठाकर एक साथ आगे बढ़ने की कला सीखनी होगी.

इसमें सुधार के उपाय– भिन्न भिन्न विचारों के लोगों से बात चित करें. उनके विचारों को समझे. कॉलेज जीवन में आपको विविध विचार, भाषा तथा जीवन शैली के लोग मिलते हैं. आप उनके साथ काम कर या वार्तालाप कर सामंजस्य की कला को सीख सकते हैं. ध्यान रखिये जिस संख्या में बहुविध विचार धारा के लोग आपको कॉलेज में मिलते हैं वो आगे चलकर जीवन में उतनी संख्या में नहीं मिल पायेंगे. अलग अलग विचार और संस्कृति वाले लोगों के साथ मिलकर काम करने की कोशिश करें. इससे सामंजस्य का गुण स्वतः आपमें विकसित हो जायेगा.

तकनिकी भाषा के ज्ञान के अतिरक्त ये कुछ सॉफ्ट स्किल्स हैं, जिसे आपको व्यावसायिक जीवन में सफलता हेतु आपनाने तथा जानने की कोशिश करनी चाहिए.

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