चंदा कोचर की आईसीआईसीआई बैंक के शीर्ष पर पहुंचने की यात्रा

भारत के दूसरे सबसे बड़े बैंक की वर्तमान एमडी–सीईओ की सफलता न सिर्फ रीटेल बैंकिंग को टॉप पर चला रही है बल्कि उन्होंने इसे तब भी संभव कर दिखाया जब भारत में रीटेल बैंकिंग के क्षेत्र में काम करना बहुत मुश्किल था.

Updated: Mar 8, 2017 18:18 IST

जब एसबीआई के साथ आईसीआईसीआई बैंक को डोमेस्टिक सिस्टेमेकली इम्पोर्टेंट बैंक डोमेस्टिक सिस्टेमेकली इम्पोर्टेंट बैंक (डी–एसआईबी) घोषित किया गया था, तो एक दशक से भी कम उम्र वाले इस बैंक का बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज एसबीआई के साथ खड़े होने पर सभी को आश्चर्य हुआ था. तब से आज तक, यह समझा गया कि बैंक अपने योग्य एमडी–सीईओ श्रीमती चंदा कोचर के सक्षम हाथों में है. इन्होंने ग्राहक सेवा श्रेणी में इस बैंक को एक सर्वश्रेष्ठ बना दिया और सभी स्तरों पर तकनीक को लागू किया. यह उनके नेतृत्व का ही कमाल है कि आज यह बैंक भारतीय बाजार में इतना अच्छा कारोबार कर रहा है.  

भारत में रीटेल बैंकिंग क्षेत्र को आकार देंतीं चंदा कोचर

चंदा कोचर का जन्म 1961 में राजस्थान में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल थे, लेकिन जब वे मात्र 13 वर्ष की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया. उसके बाद, उनका परिवार मुंबई आ गया और उन्होंने वहीं से अपना ग्रैजुएशन और पीजी किया. इन्होंने अकाउंटेंसी और कॉस्ट मैनेजमेंट में भी कोर्स किया. हालांकि उनके बचपन का सपना आईएएस अधिकारी बनने का था, लेकिन 1984 में उन्होंने बतौर प्रबंधन प्रशिक्षु आईसीआईसीआई ज्वाइन किया. उसके बाद, उन्होंने पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा और 1994 में आईसीआईसीआई बैंक की स्थापना के बाद उन्हें बैंक में कई प्रकार की जिम्मेदारियां भी दी गईं. किसी भी मामले में गो–टू ऑफिसर होने के नाते, उनके प्रयासों को स्वीकार किया गया और वे आईसीआईसीआई बैंक की पहली महिला एमडी–सीईओ बनीं.

उनकी उपलब्धियां और किन कारणों से वे इन उपलब्धियों को हासिल कर पाईं

किसी भी मामले में गो–टू ऑफिसर होने के नाते, उनके प्रयासों को स्वीकार किया गया और वे आईसीआईसीआई बैंक की पहली महिला एमडी–सीईओ बनीं.

  • आईसीआईसीआई का आईसीआईसीआई बैंक में विलयः आईसीआईसीआई बैंक 1994 में शुरु हुआ था लेकिन रीटेल बैंकिंग का क्षेत्र पहले से ही बहुत भरा था और बैंक इंडस्ट्री में उच्च ब्याज दरों पर ऋण का विस्तार किया करते थे. आईसीआईसीआई बैंक ने कोचर के नेतृत्व में कम ब्याज दरों पर ऋण लेना संभव बनाया साथ ही कारोबार को भी बढ़ाया.
  • निवेश और कॉरपोरेट बैंकिंगः आईसीआईसीआई विकास वित्त संगठन (डेवलपमेंट फाइनैंस ऑर्गनाइजेशन) के तौर पर शुरु हुआ था लेकिन श्रीमति कोचर के सक्षम नेतृत्व में जल्द ही यह निवेश बैंक के साथ–साथ कॉरपोरेट फाइनैंसिंग हब के तौर पर उभरा.
  • चुनौती का सामना करनाः श्रीमति कोचर हमेशा चुनौतियों का सामना करने में विश्वास करती हैं औऱ इसी वजह से उन्होंने भारत में रीटेल बैंकिंग के विकास के लिए चार सी ( C) निर्दिष्ट किए– लागत (कॉस्ट), ऋण (क्रेडिट), सीएएसए अनुपात और पूंजी (कैपिटल).
  • त्वरित निर्णय लेने की योग्यताः यह कुछ ऐसा है जिसे एक नेता से करने की उम्मीद होती है औऱ श्रीमती कोचर ने इस मामले में निराश नहीं किया. उन्होंने महत्वपूर्ण फैसले बहुत तेजी से लिए और जब वे इन्वेस्टमेंट बैंकिंग से रीटेल सेग्मेंट में गईं तो यह साबित हो गया. उन्होंने रीटे सेग्मेंट को राजस्व पैदा करने वाला कारोबार बना दिया और भारत में रीटेल बैंकिंग के बारे में बहुत कम जानकारी होने के बावजूद उन्होंने त्वरित निर्णय किए.
  • नई चीजों को सीखने की लालसा: यह एक ऐसी चीज है जो इसे प्रत्येक सफल व्यक्ति सफलता प्राप्त करने के औजार के तौर पर देखता है. श्रीमती कोचर भी इससे अलग नहीं हैं क्योंकि वे कहती हैं कि नई चुनौतियां हमेशा होंगी और आगे बढ़ने के लिए आपको उनका सामना करने को तैयार रहना होगा.
  • परिवार– काम का सही संतुलनः एक महिला के लिए यह एक और चुनौती है क्योंकि उन्हें घर की जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं. श्रीमति कोचर ने इसे बहुत आसान बना दिया. वे एक बेटी की मां हैं और उनकी बेटी को भी अपनी मां पर गर्व है.
  • व्यापार की दक्षताः जिस क्षेत्र में वह काम कर रही हैं यानि बैंकिंग, के भविष्य को समझने के लिए उनमें सही प्रकार का व्यावसायिक कौशल है. इसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कुछ अधिग्रहण जैसे बैंक ऑफ राजस्थान का अधिग्रहण करना और उसका विलय आईसीआईसीआई बैंक में कराना, शामिल है, भी किए.
  • तकनीक पर फोकसः उन्होंने बहुत जल्द यह बात समझ ली थी कि तकनीक बैंकिंग का भविष्य है और इसी के परिणामस्वरूप उन्होंने अपने बैंक के सभी क्षेत्रों में तकनीक का प्रयोग करना शुरु कर दिया. इसी वजह से ग्राहक सेवा में सुधार हुआ और इस बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों के साथ प्राइवेट बैंकों के कारोबार में अपनी पैठ बढ़ाई.
  • ईमानदारी और दृढ़संकल्पः ये ऐसे दो गुण हैं जिन्हें वे आज भी खुद में बनाईं हुईं हैं और उनके सहकर्मी इसके गवाह हैं. हर एक चीज के प्रति उनका अप्रोच बहुत फोकस्ड होता है और किसी भी चीज में वे समय बर्बाद नहीं करतीं. सुबह लिफ्ट की तरफ बढ़ने से लेकर शाम को दफ्तर छोड़ते समय, हर एक मिनट का वो पूरा– पूरा इस्तेमाल करती हैं.

योग्यता के लिए कुछ सम्मान

बैंकिंग क्षेत्र के लोगों के साथ– साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण क्षेत्र के लोगों ने देश में रीटेल बैंकिंग क्षेत्र को आकार देने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है.

  • वे इंटरनेशनल मॉनेट्री कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष हैं. यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया के सबसे बड़े 30 संगठनों के एग्जीक्यूटिव्स को एक साथ एक मंच पर लाता है.
  • उन्हें भारत सरकार ने वर्ष 2011 में भारत से सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मानों में से एक पद्म भूषण से सम्मानित किया था.
  • वर्ष 2015 में टाइम मैग्जीन ने उन्हें सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था.
  • वे भारतीय बैंक संघ (आईबीए), भारत में बैंकरों की निकाय, की उपाध्यक्ष हैं.
  • फोर्ब्स मैग्जीन के वर्ष 2015 की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में उन्हें 36वीं रैंक दी गई थी.
  • वे व्यापार एवं उद्योग पर बने प्रधानमंत्री के परिषद की एक सदस्य भी हैं. यह परिषद उच्च स्तर का बोर्ड है जो देश में व्यापार और उद्योग संबंधी मामलों पर फैसले करता है.

श्रीमति कोचर ने पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी दृढ़ता, समर्पण और नई चीजों को सीखने की इच्छाशक्ति के साथ राह बनाई और इनके जरिए नई चुनौतियों का सामना करना शुरु किया. भारत में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक में प्रबंधन प्रशिक्षु से लेकर शीर्ष रैंक वाली अधिकारी बनने की यात्रा में वे अभूतपूर्व रही हैं. वास्तव में वे महिलाओं के साथ– साथ पुरुषों के लिए भी रोल मॉडल हैं. ऐसे सभी लोग जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करने की इच्छा रखते हैं, वे इस महिला के जीवन से सीख ले सकते हैं. एक रूढ़ीवादी और सबसे महत्वपूर्ण महिला होने के बावजूद इन्होंने कैसे ये सब प्राप्त किया, इसे समझ सकते हैं.

शुभकामनाएं।

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