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टीचर बनना है लक्ष्य तो जानें क्या है अंतर-प्राईमरी, टीजीटी, पीजीटी, लेक्चरर और प्रोफ़ेसर पदों में

Apr 13, 2018 10:41 IST
    Primary Teacher, TGT, PGT, Professor and Lecturer Posts
    Primary Teacher, TGT, PGT, Professor and Lecturer Posts

    वैसे तो करियर के मामले में ढेरों ऐसे प्रोफेशन है जो आज के युवाओं को अपनी और आकर्षित करते हैं लेकिन अगर किसी बेहद शालीन, सम्मानित और पवित्र आजीविका की बात की जाए तो शिक्षण, अध्यापन, या टीचिंग के प्रोफेशन का नाम इनमें सबसे पहले स्थान पर आता है. शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनकर आप जो देश के भविष्य को गढ़ने का गौरवपूर्ण कार्य करते हैं. उसके बदले में ये जॉब्स आपको आकर्षक सैलरी के साथ समाज में इज्ज़त, जीवन में स्थायित्व, संतुष्टि तथा भविष्य की सुरक्षा प्रदान करते हैं. तो आइए दोस्तों आज हम जानते हैं टीचिंग जॉब के विभिन्न करियर के बारे में साथ हीं जानते हैं कि क्या है अंतर प्राईमरी टीचर, ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर, लेक्चरर, असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर और प्रोफ़ेसर में.

    1. प्राईमरी टीचर या प्राथमिक स्तर का टीचर - सबसे पहले बात करते हैं प्राईमरी टीचर या प्राथमिक शिक्षक के बारे में. प्राईमरी स्कूल के टीचर कक्षा 1 से कक्षा 6 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए इलिजिबल होते हैं. प्राईमरी टीचर बनने के लिए कैंडिडेट को एनटीटी या नर्सरी टीचर ट्रेनिंग कोर्स या जेबीटी या जूनियर टीचर ट्रेनिंग कोर्स करना आवश्यक होता है इन सभी कोर्सेस के लिए कैंडिडेट का 12वीं पास होना जरुरी होता है. साथ हीं अभ्यर्थी की आयु सीमा भी 18 से 30 के बीच हीं होनी चाहिए. इस कोर्स को करने के बाद कैंडिडेट प्राइमरी टीचर बनने के लिए एलिजिबल हो जाता है. बात अगर उत्तर प्रदेश राज्य के अभ्यर्थीयों की करी जाए तो जहाँ बीटीसी या बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कोर्स को करने के बाद कैंडिडेट प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल में शिक्षण कार्य के लिए एलिजिबल हो जाता है वहीँ बिहार और मध्य प्रदेश में प्राइमरी टीचर बनने के लिए डीएड या डिप्लोमा इन एजुकेशन का कोर्स कराया जाता है. यह दो साल का कोर्स है जिसे करने के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास निर्धारित है. बीटीसी या बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कोर्स को करने के लिए उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना आवश्यक है.
    सैलरी -  सातवें वेतन आयोग के अनुसार प्राइमरी टीचर की सैलरी 29,900 से 104,400 के लगभग होती है प्लस ग्रेड पे 14400 रूपए.
    प्राइमरी, अपर प्राइमरी तथा हाई स्कूल में शिक्षण कार्य के लिए बीएड या बैचलर ऑफ़ एजुकेशन की डिग्री आजकल सबसे लोकप्रिय कोर्स है. इस कोर्स की अवधि दो साल की होती है. 

    2. ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर - ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर या (TGT) टीजीटी पास शिक्षक मिड्ल स्कूल के बच्चों को यानि छठी क्लास से लेकर दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए इलिजिबल होते हैं. ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर या TGT के लिए ग्रेजुएशन तथा B.Edकी डिग्री अनिवार्य होती है.
    सैलरी - 7वें पे कमीशन के बाद ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर की सैलरी 29,900 से 1,04,00 के लगभग होती है (वर्तमान में 9,300 से 34,800) प्लस 4600 ग्रेड पे.

    3. पोस्ट ग्रेजुएट टीचर - पोस्ट ग्रेजुएट टीचर या पीजीटी कोर्स किया हुआ शिक्षक सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी के स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए इलिजिबल होता है. पोस्ट ग्रेजुएट टीचर बनने के लिए आपका पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड व CTET होना जरुरी है.

    सैलरी - सैलरी की बात की जाए तो 7वें पे कमीशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएट टीचर या PGT टीचर की सैलरी   29,900 से 1,04,00 (वर्तमान में 9,300 से 34,800) रूपए मंथली प्लस 4800 ग्रेड पे होता है.

    आयु सीमा 21 से 40 वर्ष

    4. लेक्चरर- लेक्चरर/जूनियर फेलो रिसर्चर या डिग्री कॉलेज का टीचर बनने के लिए पहले अभ्यर्थी के पास पीएचडी या एम.फिल की डिग्री पर्याप्त हुआ करती थी पर 2009 में बने कोर्ट के एक नियम के अनुसार अब लेक्चरर के लिए केवल वही उम्मीदवार योग्य माने जाते हैं जिन्होंने यूजीसी नेट (NET) व स्लेट (SLET)एक्जाम्स क्लियर किया हो.
    नेट की परीक्षा वर्ष में दो बार जून और दिसम्बर में आयोजित की जाती है, जिसमें स्नातकोत्तर प्रतियोगी हिस्सा ले सकते हैं. तो अगर आप भी लेक्चरर बनना चाहते हैं तो इसके लिए पहले आपको सी.एस.आई.आर या यू.जी.सी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ेगी. ये परीक्षाएं अलग-अलग सरकारी विभाग द्वारा ली जाती हैं. सी.एस.आई.आर तथा यू.जी.सी (विश्वविध्यालय अनुदान आयोग) इन परीक्षाओं का आयोजन करवा कर अपनी सम्बंधित प्रवेश परीक्षाएं संचालित करते हैं. पहली परीक्षा विज्ञान तथा दूसरी कला व अन्य विधाओं के लिए संचालित की जाती है.

    सैलरी - लेक्चरर/जूनियर फेलो रिसर्चर या डिग्री कॉलेज का टीचर की सैलरी 3700 से 5300 के लगभग होती है.

    5. असिस्टेंट प्रोफ़ेसर - जैसा कि नाम से हीं जाहिर है प्रोफ़ेसर के सहायक को असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर कहते हैं. यह स्नातक के शिक्षार्थियों को पढ़ाने के लिए योग्य होते हैं. असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर बनने के लिए किसी भी अभ्यर्थी का कॉलेज /यूनिवर्सिटी स्तर पर कम से कम 8 साल का शिक्षण का अनुभव या रिसर्च लेक्चरर/ जूनियर फेलो रिसर्चर के तौर पर कार्यानुभव नितान्त आवश्यक है. फिलहाल भारत के सरकारी कॉलेजों में लेक्चरर/असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर बनने का तो एक हीं मार्ग है और वह है अभ्यर्थी का यूजीसी नेट उत्तीर्ण करना.

    सैलरी - सातवें वेतन आयोग के अनुसार असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर का पे स्केल - 46800 से 117300 रूपए के लगभग होता है प्लस एकेडमिक लेवल 12 के साथ राशनलाईज्ड इंट्री पे रूपए 79800/

    6. प्रोफ़ेसर - कॉलेज के वरिष्ठ अध्यापक को आमतौर पर प्रोफ़ेसर कहते हैं. भारत की शिक्षा प्रणाली में कॉलेज के शिक्षकों के सभी पद वरीयता की दृष्टि से प्रोफ़ेसर के पद से नीचे होते हैं. प्रोफ़ेसर का पोस्ट एक प्रमोशनल पोस्ट है यानि कि सीधे सीधे किसी कॉलेज/यूनिवर्सिटी का प्रोफ़ेसर नहीं बना जा सकता बल्कि इसके लिए आपके पास अनुभव का होना आवश्यक है. किसी भी व्यक्ति को लेक्चरर के तौर पर किसी कॉलेज/यूनिवर्सिटी में कम से कम दस साल तक शिक्षण कार्य करने के उसके अनुभव, प्रदर्शन और वरिष्ठता के आधार पर हीं प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोट किया जाता है.

    सैलरी - 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद प्रोफ़ेसर की सैलरी 67,000 से 79,000 रूपए लगभग प्लस एकेडमिक लेवल 15 के साथ राशनलाईज्ड इंट्री पे रूपए 182200/

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