Bharat Bandh on 9th July: 9 जुलाई को बंद रहेगा भारत? जानें क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद? जानें

Jul 11, 2025, 11:33 IST

9 जुलाई 2025 भारत के लाखों कर्मचारी सड़क पर उतरने के लिए तैयार है। बता दें कि कर्मचारी देशव्यापी हड़ताल पर बैठने वाले है। इस हड़ताल का मक्सद सरकार से अपनी बातें मनवाना है, जिससे करोड़ो कर्मचारी को फायदा मिलेगा। आइए इस हड़ताल के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं। 

Bharat Band
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अगर आप अपना कोई जरूरी काम बुधवार को करने का विचार बना रहे हैं, तो थोड़ा ठैहरे, क्योंकि कल आपके सभी योजनाओं पर पानी डाल सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देशभर में बुधवार 9 जुलाई 2025 को हड़ताल रहने वाला है। भारत के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी देशव्यापी हड़ताल पर बैठने के लिए पूरी तरह से तैयारी है और उनकी तरफ से इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई है। विभिन्न विभागों के कर्मचारी इन हड़ताल का हिस्सा बनने वाले हैं, जैसे की बैंकिंग, बीमा, हाईवे निर्माण और कोयला खनन समेत कई सेक्टर के मुलाजिम कल आपको सड़को पर नजर आएंगे। अब सवाल यह आता है कि आखिर यह हड़ताल क्यों हो रहा है और इसके पीछे क्या वजह है। सरकार की मजदूर, किसान और देश विरोधी नीतियों के विरोध में 10 ट्रेड यूनियनों और उनकी सहयोगी इकाइयों ने यह हड़ताल बुलाई है। जिससे कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि 9 जुलाई की प्रस्तावित हड़ताल कोई प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की नीतियों और मजदूरों के अधिकारों और हितों पर अहम सवाल उठाने की एक बड़ी कोशिश है। अगर हड़ताल सफल होती है तो इसका असर सिर्फ सेवाओं पर ही नहीं बल्कि सरकार की नीतियों पर भी पड़ सकता है। 

क्या है हड़ताल की वजह?

"भारत बंद" का आह्वान देश की 10 बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर किया है। उनका कहना है कि सरकार केवल बड़े कॉरपोरेट के हित में काम कर रही है, जबकि आम आदमी की नौकरियां, वेतन और सुविधाएं कम होती जा रही हैं। साथ ही सरकार श्रम कानूनों को कमजोर करके यूनियनों की ताकत को खत्म करना चाहती है। इसके अलावा सरकार की नीतियां भी कर्मचारियों और किसानों के खिलाफ हैं। यूनियनों का मानना है कि उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री को 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा था। आइए इन ज्ञापन पर एक बार नजर डालते हैं:

बेरोजगारी दूर करने के लिए नई भर्तियां शुरू की जाएं

  • युवाओं को नौकरी मिले, सेवानिवृत्त लोगों की दोबारा भर्ती बंद की जाए
  • मनरेगा की मजदूरी और दिनों की संख्या बढ़ाई जाए
  • शहरी बेरोजगारों के लिए भी मनरेगा जैसी योजना लागू की जाए
  • निजीकरण, ठेका आधारित नौकरियों और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाई जाए
  • चार श्रम संहिताओं को खत्म किया जाए, जो कर्मचारियों के अधिकार छीनती हैं
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन जैसी बुनियादी जरूरतों पर खर्च बढ़ाया जाए
  • सरकार ने 10 साल से सालाना श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।

हड़ताल के दौरान कौन सी सुविधाएं रहेंगी अस्थगित?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत बंद के दौरान क्या खुलेगा और क्या बंद रहेगा? तो, आइए इन चीजों पर जरा नजर डालते हैं-

क्या-क्या रहेगा बंद?

देशव्यापी हड़ताल के दौरान कई जरूरी सेवाएं बंद रह सकती हैं। आइए जानते हैं किन चीजों का सीधा असर आपके ऊपर पड़ने वाला है-

  1. बैंकिंग सेवाएं
  2. बीमा कंपनियों का काम
  3. पोस्ट ऑफिस
  4. कोयला खदानों का कामकाज
  5. राज्य परिवहन सेवाएं (सरकारी बसें)
  6. हाईवे और कंस्ट्रक्शन का काम
  7. सरकारी फैक्ट्रियों और कंपनियों का प्रोडक्शन।

क्या-क्या खुला रहेगा?

  1. हड़ताल के दौरान आप इन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं-
  2. प्राइवेट सेक्टर की ज्यादातर कंपनियां खुली रहेंगी
  3. अस्पताल, मेडिकल इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रहने की उम्मीद
  4. प्राइवेट स्कूल/कॉलेज और ऑनलाइन सेवाएं।

हड़ताल का समर्थन कौन करता है?

हड़ताल में 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी शामिल होने वाले हैं। इस हड़ताल में किसानों और ग्रामीण श्रमिकों का भी समर्थन रहने वाला है। एनएमडीसी लिमिटेड, अन्य खनिज, स्टील कंपनियों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि मजदूर संगठन भी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं और शामिल भी हो सकते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले मजदूर संगठनों ने 26 नवंबर 2020, 28-29 मार्च 2022 और 16 फरवरी 2024 को देशव्यापी हड़ताल की थी।

भारत बंद के पीछे कौन है? 

10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों का गठबंधन हड़ताल का आयोजन कर रहा है। इनमें INTUC, AITUC, CITU, HMS, AIUTUC, AICCTU, SEWA, LPF, UTUC और TUCC शामिल हैं। ये यूनियनें सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के खिलाफ़ विरोध करने के लिए एक साझा मंच पर आई हैं।

किसानों और ग्रामीण श्रमिकों का समर्थन 

संयुक्त किसान मोर्चा और विभिन्न कृषि श्रमिक संघों ने अपना समर्थन दिया है। वे बढ़ती बेरोजगारी, मुद्रास्फीति और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती पर चिंताओं का हवाला देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लामबंदी की योजना बना रहे हैं। 

स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों का क्या? 

शैक्षणिक संस्थान और निजी कार्यालय खुले रहने की संभावना है, हालांकि मामूली व्यवधान संभव है। बस, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब सहित सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को सड़क अवरोधों और विरोध मार्च के कारण कुछ शहरों में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।

Mahima Sharan
Mahima Sharan

Sub Editor

Mahima Sharan, working as a sub-editor at Jagran Josh, has graduated with a Bachelor of Journalism and Mass Communication (BJMC). She has more than 3 years of experience working in electronic and digital media. She writes on education, current affairs, and general knowledge. She has previously worked with 'Haribhoomi' and 'Network 10' as a content writer. She can be reached at mahima.sharan@jagrannewmedia.com.

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