भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजीआई) न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने 23 अगस्त 2018 को सुप्रीम कोर्ट में एक आयोजन में वादकारियों और अधिवक्ताओं (litigants and lawyers) के लाभ के लिए ई-फाइलिंग, ई-पे और एनएसटीईपी एप्लीकेशंस का शुभारंभ किया.
विधि एवं न्याय मंत्री माननीय रविशंकर प्रसाद ने एप्लीकेशंस के मैनुअल और ई-कोर्ट परियोजना के तहत उपलब्ध सेवाओं के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के लिए पुस्तिकाएं जारी कीं, ताकि ई-कोर्ट परियोजना के तहत किए जाने वाले कामों का प्रचार हो तथा वादकारियों, अधिवक्ताओं और अन्य हितधारकों को इन सेवाओं का लाभ उठाने में मदद मिले.
ई-फाइलिंग एप्लीकेशन:
• ई-फाइलिंग एप्लीकेशन efiling.ecourts.gov.in पर उपलब्ध है.
• अधिवक्ता और वादकारी ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं.
• इस एप्लीकेशन के जरिये देश के किसी भी हिस्से से किसी भी अदालत में मुकदमा दायर किया जा सकता है.
• इस पोर्टल पर वादकारियों और अधिवक्ताओं के मामलों का प्रबंधन संभव है और व्यक्ति को दायर मुकदमे के बारे में समय-समय पर जानकारी मिलेगी.
• जो लोग डिजिटल हस्ताक्षर के लिए टोकन खरीदने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें ई-हस्ताक्षर की सुविधा उपलब्ध रहेगी.
महत्व:
• ई-फाइलिंग एप्लीकेशन से न्याय प्रणाली के कारगर प्रशासन की सुविधा होगी तथा फाइलिंग काउंटरों पर दबाव कम होगा और काम में तेजी आयेगी.
• डाटा एंट्री भी और सटीक हो जाएगी, जिससे न्यायालय प्रशासन को डाटा आधारित निर्णय में सहायता मिलेगी.
ई-पे एप्लीकेशन:
• ई-पे एप्लीकेशन pay.ecourts.gov.in पर उपलब्ध है.
• यह एक एकीकृत पोर्टल है जिसमें ऑनलाइन कोर्ट फीस भरने की सुविधा होगी.
• ई-पेमेंट एक सुरक्षित जरिया है.
• शुरूआत में यह सुविधा महाराष्ट्र और हरियाणा में उपलब्ध होगी. इसके लिए ओटीपी दिया जाएगा और एसएमएस के जरिये पावती प्रदान की जाएगी.
एनएसटीईपी (नेशनल सर्विस एंड ट्रैकिंग ऑफ इलेक्ट्रानिक प्रोसेस) एप्लीकेशन:
• एनएसटीईपी ई-कोर्ट परियोजना का एक अन्य अनोखा एप्लीकेशन है.
• यह वाद सूचना सॉफ्टवेयर (सीआईएस), वेबपोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन के बीच एक सहयोगी के रूप में काम करेगा.
• यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रक्रियाओं के अंतरण के लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली है.
• एनएसटीईपी सीआईएस के जरिये क्यूआर कोड के साथ स्वयं प्रक्रिया शुरू करेगा, पोर्टल पर प्रक्रियाओं को प्रकट करेगा और देश के अन्य अदालतों में प्रक्रियाओं का अंतरण करेगा.
• इस सेवा से वादकारियों को प्रक्रिया-सेवा की स्थिति की जानकारी सही समय पर प्राप्त होगी, ताकि वादकारियों को तुरंत कार्रवाई करने का अवसर मिल सके.
ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना:
• ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना प्रथम चरण को 2011-2015 के दौरान क्रियान्वित किया गया था.
• ई-कोर्ट मिशन मोड के तहत जिला और अधीनस्थ अदालतों के कंप्यूटरीकरण के लिए 639.41 करोड़ रुपये जारी किए गए.
• पहले चरण के अंत तक 14,249 जिला और अधीनस्थ अदालतों के कंप्यूटरीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इनमें से सभी को कंप्यूटरीकरण के लिए तैयार कर लिया गया था. 13,643 अदालतों में एलएएन लगाए गए, 13,436 अदालतों को हार्डवेयर उपलब्ध कराए गए और 13,672 अदालतों में सॉफ्टवेयर लगाए गए.
• लेपटॉप 14,309 न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए और सभी हाईकोर्टों में परिवर्तन प्रबंधन अभ्यास पूरा कर लिया गया है.
ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के दूसरे चरण:
परियोजना के दूसरे चरण (2015-19) के तहत अब तक 1078 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं. 16,089 जिला और अधीनस्थ अदालतों का कंप्यूटरीकरण पूरा कर लिया गया है.
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