नीदरलैंड द्वारा 13 मार्च 2017 को तुर्की के विदेश मंत्री पर नीदरलैंड में प्रवेश करने पर प्रतिबन्ध लगाया गया. इस कदम से दोनों देशों के मध्य राजनैतिक तनाव में वृद्धि हुई तथा दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कुछ प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय लिया.
इस कदम के परिणामस्वरुप नीदरलैंड में तुर्क नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया जबकि अंकारा में डच दूतावास को सील कर दिया गया.
दोनों देशों के मध्य संबंधों में उस समय नाटकीय परिवर्तन आया जब तुर्की के विदेश मंत्री एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने नीदरलैंड पहुंच रहे थे. उनके विमान को रूटर बांध में उतरने की अनुमति नहीं दी गयी.
इसके कारण तुर्की के नागरिकों ने रूटर बांध सहित नीदरलैंड के विभिन्न शहरों में कड़ा विरोध किया. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के मध्य झडपें भी देखने को मिलीं. इससे पूर्व तुर्की की सामाजिक नीतियों की मंत्री फातिमा काया को भी नीदरलैंड में सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं करने दिया गया था. फातिमा काया तुर्की में 16 अप्रैल 2017 को होने वाले जनमत संग्रह के बारे में समारोहों में भाग लेना चाहती थीं लेकिन डच पुलिस ने उन्हें निर्वासित कर दिया.
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन हाल ही में दिए गये बयान से तनाव और बढ़ने की आशंका है. उन्होंने कहा, "नाजीवाद अभी भी पश्चिम में व्याप्त है और नीदरलैंड्स द्वारा तुर्की के मंत्रियों के साथ किया गया व्यवहार नाजीवाद, फासीवाद का उदहारण है." इसके जवाब में नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे ने भी प्रतिक्रिया देते हुए एर्दोगन की टिप्पणी को पूर्णत: अस्वीकार्य और गैर-जिम्मेदाराना बताया तथा उनसे माफी मांगने के लिए कहा.
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