भारत के चुनाव आयोग ने 15 जून, 2021 को 'आम चुनाव 2019: एक एटलस' जारी की है.
मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के साथ एटलस जारी की है.
चंद्रा ने इस काम की सराहना की है और आगे यह कहा है कि, यह दस्तावेज भारतीय चुनावों के विशाल परिदृश्य की खोज में शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए फायदेमंद होगा.
आम चुनाव 2019: एक एटलस में क्या शामिल है?
• इस एटलस में आम चुनाव, 2019 के सभी सांख्यिकीय आंकड़े और डाटा शामिल हैं. इसमें 90 टेबल और 42 विषयगत मानचित्र समाविष्ट हैं जो वर्ष 2019 के आम चुनावों के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं.
• इस एटलस में उन 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का डाटा दिखाया गया है जहां महिला मतदान प्रतिशत पुरुष मतदान प्रतिशत से अधिक था और सबसे छोटे और सबसे बड़े संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के बारे में भी इस एटलस में जानकारी प्रदर्शित की गई है.
• इस एटलस में विभिन्न आयु वर्गों में मतदाता लिंग अनुपात और निर्वाचकों जैसे विभिन्न तुलना चार्ट के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों में मतदाताओं के डाटा को प्रदर्शित किया गया है. भारतीय चुनावों के इतिहास में सबसे कम लिंग अंतर वर्ष, 2019 के आम चुनावों के दौरान ही देखा गया था.
• इस एटलस में वर्ष, 2014 और वर्ष, 2019 के आम चुनावों के दौरान विभिन्न राज्यों में प्रति मतदान केंद्र पर मतदाताओं की औसत संख्या की तुलना भी की गई है.
• इस एटलस में वर्ष, 1951 से आम चुनावों में लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या की भी तुलना शामिल की गई है. वर्ष, 2019 के आम चुनावों में कुल 8054 योग्य उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था.
‘आम चुनाव 2019: एक एटलस’ के क्या लाभ हैं?
• चुनाव आयोग ने अक्टूबर, 2019 में 543 संसदीय क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए चुनावी रिकॉर्ड के आधार पर यह सांख्यिकीय रिपोर्ट जारी की है.
• इस एटलस को एक सूचनात्मक दस्तावेज के तौर पर काम करने के लिए तैयार किया गया है जो भारतीय चुनावी प्रक्रिया को समझने में मदद करता है और पाठकों को देश में परिवर्तनों और रुझानों का विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है.
भारत में चुनावी डाटा का संकलन
• भारत का चुनाव आयोग वर्ष, 1951-52 में हुए पहले आम चुनावों के बाद से सांख्यिकीय पुस्तकों और आख्यानों/ नैरेटिव्स के तौर पर चुनावी डाटा संकलित कर रहा है.
• वर्ष, 2019 में हुआ 17वां आम चुनाव अब तक का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव रहा है, जिसमें भारत के 32 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 10.378 लाख मतदान केंद्रों पर 61.468 करोड़ मतदाताओं ने अपने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल किया था.
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