दक्षिण अफ्रीका के उच्चतम न्यायालय ने देश के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को अदालत की अवमानना के लिए 29 मई 2021 को 15 महीने कैद की सजा सुनाई है. पिछले वर्ष नवंबर में स्टेट कैप्चर में जांच आयोग के समक्ष सुनवाई का बहिष्कार करने और फिर इसमें शामिल होने से इंकार करने के लिए उन्हें सजा सुनाई गई.
उनको अदालत की अवमानना में यह सजा सुनाई गई है. जैकब जुमा 2009 से 2018 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रहे थे. उनकी जोंडो कमीशन के द्वारा जांच की जा रही है. सजा सुनाने के दौरान जुमा अदालत में उपस्थित नहीं थे.
अदालत ने जुमा को पांच दिन का समय दिया
अदालत ने जुमा को पांच दिन का थाने में समर्पण करने का समय दिया है. अदालत ने यह भी कहा कि सजा निलंबित नहीं की जा सकती है.
पूर्व राष्ट्रपति का बयान
पूर्व राष्ट्रपति ने इससे पहले बयान दिया था कि वह जांच में सहयोग के बजाय जेल जाना बेहतर समझते हैं. अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस व्यक्ति (जुमा) ने दो बार गणतंत्र और इसके कानून की शपथ ली हो, वह खुद कानून का पालन करने से कैसे मुकर सकता है.
संगठनों ने सजा दिए जाने का स्वागत किया
तीन वर्ष पहले जुमा का कार्यकाल समाप्त होने के कुछ महीने पहले उनकी अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया था. वह अन्य आपराधिक मामलों का भी सामना कर रहे हैं, जो उन पर एक दशक से अधिक समय से चल रहे हैं. विभिन्न सामाजिक संगठनों ने जुमा को सजा दिए जाने का स्वागत किया है.
भ्रष्टाचार करने का आरोप
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा पांच करोड़ रैंड (लगभग 26 करोड़ रुपये) के भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं. उन पर मूल रूप से भारत में सहारनपुर के रहने वाले गुप्ता बंधुओं के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करने का आरोप है.
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