केंद्र सरकार द्वारा आगामी माह जुलाई में जीएसटी लागू किए जाने के बाद बिजली की दरों में कमी आने की संभावना है. साथ ही सरकार ने जीएसटी एक्ट की धारा 171 में मुनाफाखोरी रोकने करने का प्रावधान भी किया है.
जीएसटी एक्ट की धारा 171 के तहत यदि कोई कारोबारी जीएसटी में कटौती का फायदा कंज्यूमर तक नहीं पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मुनाफाखोरों पर निगरानी हेतु अथॉरिटी भी बनाई जाएगी. अथॉरिटी यह देखेगी कि टैक्स में कमी के मुताबिक कीमतें कम हुईं या नहीं. ई-कॉमर्स कंपनियां भी जीएसटी के दायरे में आएंगी.
सरकार द्वारा किए गए प्रावधान के अनुसार कोयले पर लगने वाला टैक्स 11.7% से घटकर 5% हो जाएगा. साफ है कि थर्मल एनर्जी का खर्च कम होगा तो बिजली की दरों पर भी उसका प्रभाव दिखाई देगा.
कारोबारी की गिरफ्तारी-
- जीएसटी का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कोई भी कारोबारी अब कम किए गए टैक्स का फायदा खुद नहीं रख पाएगा. साफ है कि जिन गुड्स और सर्विसेस में टैक्स घटाया जाएगा, उसका फायदा उस कारोबारी को जनता तक पहुंचाना ही होगा. टैक्स घटने के बाद उसी अनुपात में कीमतें भी कम करनी होंगी.
- जीएसटी की धारा 69 के तहत जीएसटी की चोरी करने वाले कारोबारी की गिरफ्तारी भी हो सकती है. धारा 79 के तहत बकाया टैक्स न चुकाने वालों का सामान और नॉन मूवेबल प्रॉपर्टी बेचकर गवर्नमेंट टैक्स वसूल सकती है.
राज्य सरकार की सर्विस टैक्स में हिस्सेदारी-
- जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकार को सर्विस टैक्स में भी कुछ हिस्सेदारी मिलेगी. इससे एंट्री टैक्स, वेट और सीएसटी खत्म होने से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकेगी.
- बीमा, बैंकिंग, मोबाईल रिचार्ज, इंटरनेट सर्विसेज में लगने वाले सर्विस टैक्स से यह हिस्सेदारी राज्य सरकार को प्रदान की जाएगी.
मकान बनाना सस्ता-
- जीएसटी लागो ओने के बाद मकान बनाना सस्ता हो जाएगा, क्योंकि इसे बनाने में काम आने वाली कई चीजों के दाम 1 जुलाई से कम हो जाएंगे.
- इसमें सीमेंट, इमारती लकड़ी, पेंट और वार्निश, पीवीसी पाइप एंड फिटिंग्स, मार्बल, ग्रेनाइट, ग्लास शीट एंड ग्लास और कई आर्टिकल्स शामिल हैं.
- सीमेंट में इनपुट रिबेट दिया जाएगा. वर्क्स कॉन्ट्रेट पर लगने वाली करंट रेट 4.5 से बढ़कर 12% होने से इसका फायदा कम हो जाएगा.
- इन पर जीएसटी फिलहाल में लगने वाले वैट से कम हो जाएगा.
जीएसटी कानून की धारा-171 के बारे में-
- जीएसटी कानून की धारा-171 के अनुसार यदि कोई मैन्युफैक्चरर इनपुट क्रेडिट लेता है तो अपना मुनाफा उसे कंज्यूमर्स के बीच बांटना होगा और यह देखने के लिए एक ऑर्गनाइजेशन बनाई जाएगी जो यह तय करेगी. किन्तु अथॉरिटी बनने तक कीमतें बढ़ सकती हैं.
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