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हिना जायसवाल ने रचा इतिहास, बनीं IAF की पहली महिला फ्लाइट इंजीनियर

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हिना जायसवाल ने येलाहांका वायुसेना स्टेशन में कोर्स पूरा करने के बाद पहली महिला फ्लाइट इंजीनियर बनकर इतिहास रच दिया है. हिना ने कहा कि बचपन से उनकी कोशिश थी कि वह सैनिक की यूनिफॉर्म पहनें और पायलट के तौर पर आसमान में उड़ान भरें.

Feb 18, 2019 11:40 IST
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फ्लाइट लेफ्टिनेंट हिना जायसवाल भारतीय वायुसेना (IAF) की पहली महिला फ्लाइट इंजीनियर बन गई हैं. वे बेंगलुरू के उत्तरी उप नगर में स्थित येलाहांका एयर बेस की 112वीं हेलीकॉप्टर यूनिट की फ्लाइट लेफ्टिनेंट थीं.

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हिना जायसवाल ने येलाहांका वायुसेना स्टेशन में कोर्स पूरा करने के बाद पहली महिला फ्लाइट इंजीनियर बनकर इतिहास रच दिया है. हिना ने कहा कि बचपन से उनकी कोशिश थी कि वह सैनिक की यूनिफॉर्म पहनें और पायलट के तौर पर आसमान में उड़ान भरें.

हिना जायसवाल:

मूल रूप से चंडीगढ़ की हिना जायसवाल ने पंजाब यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में स्नातक किया है. हिना जायसवाल वर्ष 2014 में फ्लाइट इंजीनियर के कोर्स के लिए चुनी गई थीं. हिना जायसवाल वायुसेना की इंजीनियरिंग शाखा में 5 जनवरी 2015 को सैनिक के रूप में भर्ती हुईं.

उन्होंने फ्लाइट इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में शामिल होने से पहले फ्रंटलाइन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दस्ते में फायरिंग टीम की प्रमुख और बैटरी कमांडर के तौर पर काम किया था. उन्होंने छह महीने तक सख्त प्रशिक्षण लिया, ऐसा ही प्रशिक्षण पुरूषों को भी दिया जाता है.   

हिना का फ्लाइट इंजीनियरिंग का कोर्स 15 फरवरी को पूरा हुआ था. फ्लाइट इंजीनियर के तौर पर हिना जरुरत पड़ने पर सियाचिन ग्लेशियर की बर्फीली ऊंचाइयों से अंडमान के सागर में वायु सेना की ऑपरेशनल हेलीकॉप्टर यूनिट्स पर अपनी सेवा देंगी.

 

पुरुष सैनिकों की अधिकता वाली फ्लाइट इंजीनियर ब्रांच को वर्ष 2018 में महिला अधिकारियों के लिए भी खोल दिया गया. फ्लाइट इंजीनियर विमान के फ्लाइट क्रू का सदस्य होते हैं. फ्लाइट इंजीनियर जटिल विमान प्रणाली की निगरानी और संचालन करते हैं. इसके लिए विशेष कौशल की जरूरत होती है. वायुसेना में महिला अफसरों की तैनाती वर्ष 1993 से शुरू हुई थी.

भारतीय वायुसेना के बारे में:

भारतीय वायुसेना (IAF) भारतीय सशस्त्र सेना का एक अंग है जो वायु युद्ध, वायु सुरक्षा, एवं वायु चौकसी का महत्वपूर्ण काम देश के लिए करती है. इसकी स्थापना 08 अक्टूबर 1932 को की गयी थी. आजादी से पूर्व इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से जाना जाता था और वर्ष 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आजादी के पश्च्यात इसमें से "रॉयल" शब्द हटाकर सिर्फ "इंडियन एयरफोर्स" कर दिया गया.

आज़ादी के बाद से ही भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के साथ चार युद्धों व चीन के साथ एक युद्ध में अपना योगदान दे चुकी है. भारत के राष्ट्रपति भारतीय वायु सेना के कमांडर इन चीफ के रूप में कार्य करते है. वायु सेनाध्यक्ष, एयर चीफ मार्शल, एक चार सितारा कमांडर है और वायु सेना का नेतृत्व करते है। भारतीय वायु सेना में किसी भी समय एक से अधिक एयर चीफ मार्शल सेवा में कभी नहीं होते. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.

 

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