आयकर विभाग ने 12 जुलाई 2020 को कहा कि उसने बैंकों और डाकघरों को एक नई सुविधा उपलब्ध कराई है. इसके माध्यम से आयकर रिटर्न नहीं भरने वालों (नॉन फाइलर्स) के मामले में 20 लाख रुपये से अधिक और आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों के मामले में एक करोड़ रुपये से अधिक नकद निकासी पर लागू टीडीएस दर का पता लगाया जा सकता है.
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस सुविधा का ब्यौरा देते हुए कहा कि अब बैंक या डाकघर को टीडीएस दर का पता लगाने के लिए केवल उस व्यक्ति का पैन भरना होगा, जो नकद निकासी कर रहा है. बयान में कहा गया कि अभी तक इस सुविधा के तहत 53,000 से ज्यादा सत्यापन अनुरोधों को पूरा किया जा चुका है.
पांच प्रतिशत तक कटेगा टीडीएस
एक करोड़ से अधिक नकदी निकालने पर पांच प्रतिशत टीडीएस कटेगा. यह नियम पहले से है कि अगर किसी व्यक्ति का टीडीएस काटा जाता है और उसके पास पैन नहीं है तो टीडीएस की दर 20 प्रतिशत होगी.
केंद्र सरकार ने नकद लेनदेन को हतोत्साहित करने के लिए बैंकों या डाकघरों से एक करोड़ रुपये से अधिक की नकद निकासी पर दो प्रतिशत की दर से टीडीएस लगाने की व्यवस्था की है.
टीडीएस क्या है?
आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाए तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं. सरकार टीडीएस के जरिये टैक्स जुटाती है. यह वेतन, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि स्रोतों पर काटा जाता है.
इससे संबंधित मुख्य बातें
पिछले तीन सालों से सेक्शन 194 के तहत 20 लाख रुपये से ज्यादा की नकद निकासी पर टीडीएस कट रहा है. टैक्स रिटर्न न भरने की दशा में यह टैक्स देना होगा.
20 लाख से एक करोड़ रुपये तक नकदी बैंक से निकाली तो उसकी जांच होगी. यदि आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो दो प्रतिशत टीडीएस की कटौती होगी. इतनी राशि खाते में कैसे आई, आयकर विभाग यह भी जांच कर सकता है.
सीबीडीटी ने कहा कि अब बैंक/डाकघर को TDS की दर का पता लगाने के लिए सिर्फ पैसा निकालने वाले व्यक्ति का पैन नम्बर भरना होगा. पैन नम्बर डालते ही, सिस्टम पर मैसेज आ जाएगा.
नया टीडीएस 1 जुलाई से लागू
कैश निकासी पर नया टीडीएस 01 जुलाई से लागू हो गया है. लेकिन इसकी गणना वित्त वर्ष 2020-21 के तहत 01 अप्रैल 2020 से ही होगी. सरकार की कोशिश है कि डिजिल ट्रांजेक्शन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा मिले. डिजिटल ट्रांजेक्शन से ट्रांसपरेंसी बढ़ती है और काले धन और टैक्स चोरी पर अंकुश लगता है. कैश ट्रांजैक्शन बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा देता है. लिहाजा सरकार ने कैश ट्रांजैक्शन के नियम कड़े किए हैं.
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