रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह ने 9 अगस्त को यह घोषणा की है कि, प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित समय से पहले ही 101 रक्षा वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है.
रक्षा मंत्री के अनुसार, इस कदम से घरेलू उद्योग को अगले छह से सात वर्षों के भीतर 4 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध प्राप्त होंगे क्योंकि यह प्रतिबंध वर्ष 2020 से वर्ष 2024 के दौरान विभिन्न चरणों में लागू किया जाएगा.
सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय, देश की विभिन्न रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू रक्षा उद्योग को अपने स्वयं के डिजाइन और विकास क्षमताओं का उपयोग करके वस्तुओं का निर्माण करने के साथ-साथ रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा डिजाइन और विकसित की गई तकनीकों को अपनाने का अवसर भी प्रदान करेगा.
प्रतिबंधित रक्षा वस्तुओं की सूची: मुख्य विशेषताएं
• त्रि-सेवाओं द्वारा अप्रैल 2015 से अगस्त 2020 के बीच लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये लागत की ऐसी वस्तुओं की लगभग 260 योजनाओं का अनुबंध हासिल किया गया है.
• भारतीय सेना और वायु सेना के लिए लगभग 1,30,000 करोड़ रुपये की वस्तुओं का अनुमान लगाया गया है. इसी अवधि में नौसेना द्वारा 1,40,000 करोड़ रुपये की लागत की रक्षा वस्तुओं का अनुमान लगाया गया है.
• इस सूची में उच्च प्रौद्योगिकी हथियार प्रणाली जैसेकि, असॉल्ट राइफलें, आर्टिलरी गन्स, सोनार सिस्टम्स, कोरवेट, हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, परिवहन विमान, रडार सहित कई अन्य रक्षा सामान शामिल हैं.
• रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सूची में दिसंबर 2021 की तारीख में पहिएदार आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल (एएफवी) भी शामिल हैं, जिनमें से भारतीय सेना को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर लगभग 200 एएफवी का अनुबंध हासिल करने की उम्मीद है.
• भारतीय नौसेना द्वारा भी पनडुब्बियों के लिए दिसंबर 2021 की सांकेतिक प्रतिबंध तिथि निर्धारित करने के साथ मांग रखने की संभावना है, जिसमें से लगभग छह के लिए अनुबंध होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 42,000 करोड़ रुपये है.
• भारतीय वायु सेना के लिए, एलसीए एमके 1 ए को दिसंबर 2020 की सांकेतिक प्रतिबंध तिथि के साथ सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया गया है. इनमें से, 123 की अनुमानित लागत 85,000 करोड़ रुपये से अधिक है.
रक्षा वस्तुओं के स्वदेशी उत्पादन की तैयारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, सार्वजनिक और निजी उद्योग सहित सभी हितधारकों के साथ परामर्श के बाद रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित वस्तुओं की यह सूची तैयार की गई है ताकि भारत में गोला बारूद और विभिन्न उपकरणों के विनिर्माण के लिए भारतीय उद्योग की वर्तमान और भविष्य की क्षमताओं का आकलन किया जा सके.
चूंकि आयात पर प्रतिबंध को वर्ष 2020 से वर्ष 2024 के दौरान लागू करने की योजना बनाई गई है, इसके पीछे रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग को सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं के बारे में अवगत कराना है ताकि वे भी स्वदेशीकरण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें.
रक्षा मंत्रालय ने विदेशी और घरेलू पूंजी खरीद के लिए भी वर्ष 2020-2021 के पूंजी खरीद बजट में विभाजन किया है.
चालू वित्त वर्ष में घरेलू पूंजी खरीद के लिए अलग बजट निर्धारित किया गया है, जिसका परिव्यय लगभग 52,000 करोड़ रुपये है.
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