भारत ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम और स्वदेश में विकसित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का 03 जून 2018 को सफलतापूर्वक परीक्षण किया.
इस मिसाइल को बंगाल की खाड़ी में डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप पर एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के लांच पैड-4 से सचल प्रक्षेपक (मोबाइल लांचर) की मदद से प्रक्षेपित किया गया.
यह अग्नि-5 का छठा परीक्षण था और यह पूरी तरह सफल रहा. इससे पहले 18 जनवरी 2018 को परीक्षण किया गया था. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अनुसार, अग्नि-5 श्रृंखला के अन्य मिसाइलों के विपरीत, अग्नि-5 नेविगेशन और गाइडेंस, वॉरहैड और इंजन के संदर्भ में नई प्रौद्योगिकियों के साथ सबसे उन्नत है.
अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण |
अग्नि-5 मिसाइल का पहला परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को किया गया था. दूसरा परीक्षण 15 सितंबर 2013 को किया गया. तीसरा परीक्षण 31 जनवरी 2015 और चौथा परीक्षण 26 दिसंबर 2016 को किया गया. पांचवा परीक्षण 18 जनवरी 2018 को किया गया था. ये सभी परीक्षण भी सफल रहे थे.
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परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपनी पूरी दूरी तय की एवं सभी मानकों को पूरा किया. परीक्षण के दौरान रडार, सभी ट्रैकिंग उपकरणों एवं निगरानी स्टेशनों से मिसाइल के हवा में प्रदर्शन पर नजर रखी गयी और उसकी निगरानी की गयी.
‘अग्नि-5’ मिसाइल की खासियत
• यह मिसाइल बेहद शक्तिशाली है, और 5,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है.
• अग्नि 5 बैलिस्टिक मिसाइल कई हथियार एक साथ ले जाने में सक्षम है.
• इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बनाया है.
• यह मिसाइल एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम है.
• यह भारत की लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों में से एक है.
• इस मिसाइल की ऊंचाई 17 मीटर, जबकि व्यास 2 मीटर है.
• इसका वजन करीब 20 टन है.
• यह मिसाइल डेढ़ टन तक परमाणु हथियार ले जा सकती है.
• इसकी गति ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा है.
• अग्नि 5 मिसाइल का इस्तेमाल बेहद आसान है. देश के किसी भी कोने में इसे तैनात कर सकते हैं जबकि किसी भी प्लेटफॉर्म से युद्ध के दौरान इसकी मदद ली जा सकती हैं.
• अग्नि 5 मिसाइल की कामयाबी से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी क्योंकि न सिर्फ इसकी मारक क्षमता 5 हजार किलोमीटर है, बल्कि ये परमाणु हथियारों को भी ले जाने में सक्षम है.
• अग्नि 5 मिसाइल से छोटे सैटेलाइट छोड़े जा सकेंगे. इससे दुश्मनों के सेटेलाइट को नष्ट करने में भी मदद मिलेगी.
• यह मिसाइल एक बार छूटी तो रोकी नहीं जा सकेगी. यह 1000 किलो का न्यूक्लियर हथियार ले जा सकेगी.
• अग्नि पांच के लॉन्चिंग सिस्टम में कैनिस्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसकी वजह से इस मिसाइल को कहीं भी बड़ी आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है.
पृष्ठभूमि:
अग्नि-5 मिसाइल के परीक्षण के दौरान स्वदेश निर्मित कई नयी प्रौद्योगिकियों का सफल परीक्षण हुआ. नौवहन प्रणाली, बेहद उच्च सटीक रिंग लेजर गायरो आधारित इनर्शियल नैविगेशन सिस्टम (आरआईएनएस) और अत्याधुनिक सटीक आकलन करने वाले माइक्रो नैविगेशन सिस्टम (एमआईएनएस) से यह सुनिश्चित हुआ कि मिसाइल सटीक दूरी के कुछ ही मीटर के भीतर अपने लक्ष्य बिंदु तक पहुंच गई.
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