इंफोसिस कंपनी ने 29 सितम्बर 2016 को ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए पहली बार ‘इन्फीमेकर पुरस्कारों’ की घोषणा की. इसके अंतर्गत आम जिंदगी को आसान बनाने में नई तकनीक का प्रयोग करने वालों को इंफोसिस पांच लाख रपये का पुरस्कार प्रदान करता है.
दिल्ली के छात्र अभिषेक मटलोटिया को यह पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जिन्होंने एक ऐसी वॉकिंग स्टिक बनायी है जो नेत्रहीनों के साथ-साथ बधिरों के लिए भी बहुत लाभदायक है.
इसके अलावा देशभर से 20 अन्य लोगों को भी यह पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जिसके तहत सभी को पांच-पांच लाख रपये की धनराशि दी गई है.
साइकिल रिक्शा के पैडलों को चलाने में सरल बनाने के लिए संजीव अर्जुन गौड़ ने ‘रिजनरेटिव ब्रेक’ बनाया है.
इन्फीमेकर पुरस्कारों का लक्ष्य देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को सम्मानित करना तथा अगली पीढ़ी के विचारकों की रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति का विकास करना है.
मटलोटिया के अलावा संदीप पाटिल,सौरभ अलगुंडगी एवं श्रेया गुदासलामनी ने भी कान से कम सुनने वालों की समस्या को दूर करते हुए तथा वे बहुत आसानी से बात कर सकें इसके लिए कम्युनिकेटिव ग्लोव सॉल्युशन डिवाइस ‘असिस्टयू’ बनाया है.
इंफोसिस यह पुरस्कार अपने इंफोसिस फाउंडेशन, अमेरिका की ओर से देती है. यह पुरस्कार कुल 20 लोगों को प्रदान किया गया है जिनमें बहुत से लोगो ने आम रोजमर्रा की जरूरतों के लिए तकनीकी समाधान उपलब्ध कराए हैं.
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