भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वीनस (शुक्र ग्रह) पर अपने पहले मिशन और लाल ग्रह की दूसरी योजना बना रहा है.
इसकी पुष्टि अंतरिक्ष विभाग को नवआवंटित बजट से होती है जिसमें 23% का इजाफा किया गया है. बजट में 'मंगल ऑर्बिटर मिशन II और शुक्र मिशन' के लिए अंतरिक्ष विज्ञान खंड के तहत कुछ प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है.
मंगल मिशन के बारे में
• मंगल ग्रह मिशन प्रयोगात्मक रूप से 2021-22 में निर्धारति है.
• मिशन में मुख्य रूप से एक ऑर्बिटर का प्रक्षेपण और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सेंटर नेशनल डेट्यूड्स स्पाटिएलेस (सीएनईएस) के साथ मिलकर मार्स रोवर का निर्माण करना है.
• इसरो इस बार लाल ग्रह के सतह पर एक रोबोट उतारने की भी कोशिश कर सकता है.
• मंगलयान इसरों को पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन था, जिसने इसे सोवियत स्पेस प्रोग्राम, नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी बाद मंगल पर पहुंचने वाला 4था एजेंसी बनाया था.
• मिशन ने भारत को मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और अपने पहले ही प्रयास में ऐसा कर सकने वाला दुनिया का पहला देश भी बनाया था.
प्रथम वीनस मिशन
• हालांकि भारत के प्रथम वीनस मिशन के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन पूरी संभावना है कि यह एक मामूली ऑर्बिटर मिशन होने वाला है.
• चूंकि वीनस के बारे में बहुत कम जानकारी है, इसलिए इस मिशन का निश्चित रूप से सार्थक होने की उम्मीद है.
• इस मिशन में भारत नासा का सहयोगी हो सकता है.
• दोनों ही एजेंसियों ने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिकल प्रोपल्शन के प्रयोग पर संयुक्त अध्ययन करने की कोशिश पर बातचीत शुरु कर दी है.
यह रिपोर्ट इसरो के एक ही बार में 104 उपग्रहों के मेगा लॉन्च, जो अपनी तरह का अब तक का पहला प्रयास था, के तुरंत बाद आई है.
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