जादवपुर विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की मदद से 25 मार्च 2016 को एक वाटर फिल्टर विकसित किया, जो पानी से आर्सेनिक का प्रदूषण दूर करता है.
जादवपुर विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरों के एक दल ने आर्सेनिक से प्रभावित इलाके दक्षिण 24 परगना जिले में बारूईपुर के समीप एक स्कूल में एक जल शोधक संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किया है जो प्रतिदिन 10,000 लीटर पानी का उत्पादन करता है.
परियोजना की सह समन्वयक प्रो. जयश्री राय के अनुसार यह फिल्टर आर्सेनिक से प्रदूषित भूजल को इलेक्ट्रोकेमिकल आर्सेनिक रीमेडिएशन (ईसीएआर) प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर छानता हैं ताकि आर्सेनिक एवं अन्य संदूषकों से मुक्त पेयजल मिल सके.
बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों में सफल रही ईसीएआर प्रौद्योगिकी अनिवासी भारतीय वैज्ञानिक अशोक गाडगिल ने बर्कले स्थित अपनी प्रयोगशाला में विकसित की जहां उर्जा एवं जल पर अनुसंधान किया जाता है. इस प्रौद्योगिकी में आयरन को पानी में शीघ्रता से विघटित करने के लिए बिजली का उपयोग किया जाता है जिससे एक खास प्रकार का जंग यानी मोरचा (रस्ट) बनता है. यह मोरचा पानी में मौजूद आर्सेनिक के साथ जुड़ जाता है जिससे बड़े कण बनते हैं और जब पानी को फिल्टर किया जाता है तब ये कण पानी से अलग हो जाते है.
यह बेहद सरल और सस्ती प्रौद्योगिकी है. इसके वाणिज्यिक उपयोग में भी पानी की कीमत एक रूपये प्रति लीटर हो सकती है.
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