राज्यपाल ने भंग की जम्मू-कश्मीर विधानसभा

Nov 23, 2018, 09:15 IST

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने धारा 53 के तहत विधानसभा भंग करने का आदेश दिया. इससे पहले पीडीपी ने एनसी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया था. विधानसभा भंग होने के बाद सरकार बनने की सारी संभावनाएं खत्म हो गई हैं.

J&K Governor dissolves state assembly
J&K Governor dissolves state assembly

जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग (Jammu-Kashmir Assembly) हो गई है. यह कार्रवाई तब हुई, जब 21 नवम्बर 2018 को विभिन्न पार्टियों की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश किया गया. इसके तत्काल बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक की ओर से विधानसभा भंग करने की कार्रवाई की गई.

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने धारा 53 के तहत विधानसभा भंग करने का आदेश दिया. इससे पहले पीडीपी ने एनसी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया था. विधानसभा भंग होने के बाद सरकार बनने की सारी संभावनाएं खत्म हो गई हैं.

राजभवन ने राज्यपाल की तरफ से एक बयान जारी कर कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिरता व सुरक्षा का माहौल बनाने और स्पष्ट बहुमत वाली सरकार के गठन के लिए उचित समय पर चुनाव कराने के इरादे से ही मौजूदा विधानसभा को भंग किया गया है.

विधानसभा भंग करने के चार मुख्य कारण:

राज्यपाल ने विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग करने हेतु चार मुख्य कारणों का हवाला दिया, जिसमें निम्न शामिल हैं:

•   राज्यपाल ने सबसे प्रमुख वजह सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताई है.

•   परस्पर विरोधी राजनीतिक विचारधारा वाले दलों के गठबंधन से स्थाई सरकार बनने में आशंका रही. राज्यपाल के अनुसार दो विरोधी दलों के एक साथ आने राज्य में स्थिर सरकार नहीं बन सकती. गठबंधन में शामिल कुछ दल विधानसभा भंग करने की मांग करते थे. इसके अतिरिक्त पिछले कुछ वर्षों का अनुभव यह बताता है कि खंडित जनादेश से स्थाई सरकार बनाना संभव नहीं है. ऐसी पार्टियों का साथ आना जिम्मेदार सरकार बनाने की बजाए सत्ता हासिल करने का प्रयास है.

•   व्यापक खरीद फरोख्त होने और सरकार बनाने के लिए बेहद अलग राजनीतिक विचारधाराओं के विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए धन के लेन देन होने की आशंका हैं. ऐसी गतिविधियां लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं और राजनीतिक प्रक्रिया को दूषित करती हैं.

•   बहुमत के लिए अलग अलग दावें हैं वहां ऐसी व्यवस्था की उम्र कितनी लंबी होगी इस पर भी संदेह है. जम्मू कश्मीर की नाजुक सुरक्षा व्यवस्था जहां सुरक्षा बलों के लिए स्थाई और सहयोगात्मक माहौल की जरूरत है. ये बल आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगे हुए हैं और अंतत: सुरक्षा स्थिति पर नियंत्रण पा रहे हैं.

राज्यपाल शासन:

वर्ष 2015 में राज्य में बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी. जम्मू-कश्मीर में 16 जून 2018 को भाजपा के समर्थन वापस लेने से मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार गिर गई थी. इसके बाद से ही राज्यपाल शासन लागू है. सरकार का गठन न होने की स्थिति में 19 दिसंबर 2018 को राज्यपाल शासन के छह माह पूरे होते ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता, क्योंकि राज्य संविधान के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में छह माह से ज्यादा समय तक राज्यपाल शासन लागू नहीं रखा जा सकता.

क्या हैं जम्मू-कश्मीर विधानसभा के समीकरण

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 89 सीटे हैं, जिनमें से दो सदस्य मनोनीत किए जाते हैं. ऐसी स्थिति में सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों की जरूरत होती है. मौजूदा स्थिति में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के पास 28, बीजेपी के 25 और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 सीटे हैं.

Vikash Tiwari is an content writer with 3+ years of experience in the Education industry. He is a Commerce graduate and currently writes for the Current Affairs section of jagranjosh.com. He can be reached at vikash.tiwari@jagrannewmedia.com
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