केरल सरकार ने 23 नवंबर, 2020 को एक अध्यादेश को स्थगित करने का फैसला किया है, जिसमें अपमानजनक या मानहानि करने वाले ऑनलाइन कंटेंट को 3 साल तक की कैद के साथ दंडनीय बनाने का प्रयास किया गया है.
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने, एक नया खंड डालने के लिए केरल पुलिस अधिनियम में संशोधन करने वाले विवादास्पद अध्यादेश को मंजूरी देने के एक दिन बाद यह फैसला लिया है.
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने यह कहा कि, हाल ही में केरल पुलिस अधिनियम, 2011 में किए गए संशोधनों के बारे में कई लोगों ने आशंकाएं जताई थीं, जिसके बाद सरकार ने इसे स्थगित करने का फैसला किया और विधानसभा में भी इस पर चर्चा हुई.
नया अध्यादेश क्या है?
यह नया अध्यादेश केरल पुलिस अधिनियम 2011 में संशोधन करके एक नई धारा 118A सम्मिलित करता है, जिसके मुताबिक ऐसे किसी भी ऑनलाइन कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन प्रकाशन या ऑनलाइन प्रसार के लिए 3 वर्ष की जेल के साथ-साथ 10 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है, जिस कंटेंट से किसी भी व्यक्ति या समूह के प्रति धमकी, अपमानजनक या अनादरसूचक टिप्पणी या ऐसे की मानहानि करने वाले कंटेंट का इस्तेमाल किया गया हो, जिससे उस व्यक्ति या समूह के सम्मान या धन को हानि पहुंची हो.
सेक्शन 118A: प्रमुख विवरण
- सेक्शन 118 A को सभी धाराओं में सबसे कठोर माना जा रहा है.
- यह सेक्शन अपमानजनक, अनादरसूचक और मानहानिकारक सामग्री (कंटेंट) के ऑनलाइन उत्पादन या प्रकाशन या प्रसार के दोषी पाए गए लोगों को तीन साल की कैद और 10,000 रुपये तक का जुर्माना देने का प्रस्ताव करता है.
- हालांकि, यह अपराध जमानती और संज्ञेय है.
केरल सरकार ने अध्यादेश क्यों रखा?
- केरल के मुख्यमंत्री द्वारा, CPI (M) राज्य सचिवालय और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) पार्टी के सदस्यों के साथ चर्चा करने के बाद, केरल सरकार ने इस अध्यादेश को स्थगित करने का फैसला लिया है.
- राज्य सरकार विपक्षी दलों, पत्रकारों और नागरिक अधिकारों के पक्षधर कार्यकर्ताओं द्वारा एक ऐसा कानून बनाने के लिए कड़ी आलोचना झेल रही थी, जिस कानून से बोलने की स्वतंत्रता को खतरा उत्पन्न हो गया था.
पृष्ठभूमि
इससे पहले, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने IT अधिनियम की धारा 66-A और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118-D को हटा दिया था. इन दोनों धाराओं में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन से निपटने के लिए व्यवस्था की गई थी.
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