श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति, महिंदा राजपक्षे ने 9 अगस्त, 2020 को चौथी बार देश के प्रधान मंत्री के तौर पर शपथ ली है. उनकी पार्टी द्वारा संसदीय चुनावों में शानदार जीत हासिल करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला है.
महिंद्रा राजपक्षे को उनके छोटे भाई और राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे ने पवित्र राजमाह विहार में आयोजित एक समारोह में शपथ दिलाई थी, जो उत्तर कोलंबो उपनगर केलानिया में एक बौद्ध मंदिर है.
महिंद्रा राजपक्षे को वर्ष 2009 में अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के तहत एक दशक लंबे एलटीटीई (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) युद्ध को समाप्त करने का श्रेय दिया गया है. वर्ष 2015 में, वह राष्ट्रपति चुनाव हार गए थे और जिसके बाद उन्होंने मजबूत राजनीतिक वापसी ली थी.
महिंद्रा राजपक्षे की सत्ता
महिंद्रा राजपक्षे ने वर्ष 2005 से वर्ष 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति के तौर पर कार्य किया था. इससे पहले, उन्होंने वर्ष 2004 से वर्ष 2005 तक प्रधान मंत्री के तौर पर भी कार्य किया है और फिर, वर्ष 2018 और वर्ष 2019 में संक्षिप्त अवधि के लिए भी उन्होंने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है.
महिंद्रा राजपक्षे के भाई, गोतबया राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका पोडुजना पर्मुना (एसएलपीपी) ने देश के संसदीय चुनावों में 5 अगस्त को शानदार जीत हासिल की थी. उन्होंने संसद की कुल 225 सीटों में से 145 सीटें जीतीं हैं.
श्रीलंका पोडुजाना पर्मुना (SLPP) को 6,853,693 वोट मिले हैं. इस पार्टी ने 128 चुनावी सीटें हासिल की हैं, जो 17 राष्ट्रीय सूची सदस्यों को साथ मिलाकर, संसद में कुल 145 सीटें हो गई हैं, हालांकि ये दो तिहाई बहुमत से कम थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिंद्रा राजपक्षे को दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के संसदीय चुनावों में महिंद्रा राजपक्षे को उनकी शानदार जीत के बाद बधाई दी थी.
उन्होंने अपने श्रीलंकाई समकक्ष से बात की और उन्हें बधाई दी क्योंकि चुनावों के शुरुआती परिणामों ने एसएलपीपी पार्टी द्वारा प्रभावशाली चुनावी प्रदर्शन का संकेत दिया था.
अपने एक नोट में, प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के साथ मिलकर काम करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को आगे बढ़ाने का उल्लेख किया है.
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