मलेशिया में फर्जी खबरों (फेक न्यूज) को छापने पर 10 साल की जेल की सजा हो सकती है और भारी जुर्माना लग सकता है. मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक की सरकार ने फेक न्यूज को गैरकानूनी बनाने के लिए 26 मार्च 2018 को संसद में विधेयक पेश किया. इस कदम से मीडिया की आजादी को लेकर चिंता जताई गई है.
एंटी-फेक न्यूज से संबंधित विधेयक:
• विधेयक में समाचार, सूचना, डाटा या रिपोर्ट जो पूरी तरह या आंशिक तौर पर झूठे हैं, उन्हें फेक न्यूज बताया गया है. इसमें फीचर, विजुअल और ऑडियो रिकार्डिंग भी शामिल हैं.
• एंटी-फेक न्यूज विधेयक के तहत, फेक न्यूज छापने पर पांच लाख रिंगित (मलेशिया की मुद्रा) यानी एक लाख 28 हजार 140 डॉलर (करीब 83.15 लाख रुपये) जुर्माना, 10 तक की जेल की सजा या दोनों का प्रावधान है.
• इस कानून के तहत डिजिटल प्रकाशन और सोशल मीडिया भी आते हैं.
• अगर फेक न्यूज से मलेशिया या मलेशियाई नागरिक प्रभावित होता है तो यह कानून विदेशियों सहित मलेशिया से बाहर उल्लंघन करने वालों पर भी लागू होगा.
• विपक्षी सांसदों ने ऐसे कानून की जरूरत पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार के पास पहले से ही अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया को लेकर व्यापक अधिकार हैं.
1एमडीबी घोटाले:
1 मलेशिया डेवलेपमेंट बर्हाड (1एमडीबी) के फंड में हुई अरबों रुपये की गड़बड़ी को लेकर नजीब सरकार का विरोध कर रहे प्रमुख विपक्षी नेताओं में शामिल हैं. 1एमडीबी सरकारी डेवलेपमेंट कंपनी है. इससे जुड़े मनी लांड्रिंग मामले की जांच अमेरिका, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड में भी चल रही है.
विधेयक ऐसे समय में पेश किया गया जब सरकारी फंड 1एमडीबी में घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री नजीब रजाक को व्यापक हमले का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय चुनाव की घोषणा होने की उम्मीद है.
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