केंद्र सरकार ने 02 मार्च 2020 को मध्यप्रदेश में ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य’ को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया है. यह अभयारण्य गंगा डॉल्फ़िन और अत्यंत लुप्तप्राय घड़ियाल के लिए प्रसिद्ध है.
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी एक अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की सीमा से शून्य से दो किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य’ क्षेत्र अधिसूचित करता है.
जोनल मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश
पर्यावरण मंत्रालय ने साथ ही मध्यप्रदेश सरकार को जोनल मास्टर प्लान तैयार करने का भी आदेश दिया है. इससे निरावृत क्षेत्रों की बहाली, वर्तमान जलाशयों का संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्रों का प्रबंधन, भूजल प्रबंधन, मिट्टी एवं नमी के संरक्षण, स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं और पारिस्थितिकी और पर्यावरण के ऐसे अन्य पहलुओं पर ध्यान देने में सहायता मिलेगी जिस पर ध्यान देने की जरूरत है.
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का मुख्य आकर्षण
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के त्रि-जंक्शन पर स्थित है. यह अभयारण्य मध्यप्रदेश के श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों में 435 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ हुआ है. यह 75 फीसदी घड़ियालों का प्राकृतिक आवास है. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का स्थापना साल 1979 में में हुआ था.
इस अभयारण्य में ताजा पानी में पायी जाने वाली गंगा डॉल्फिन, ताजा पानी के कछुओं की नौ प्रजातियां और पक्षियों की 180 से अधिक प्रजातियां भी पायी जाती हैं. इस अभ्यारण्य में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों सहित 330 प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं. इस अभयारण्य में भारतीय गिद्ध और गेट्रर स्पॉटेड ईगल भी शामिल है.
सदियों तक बरसात और बाढ़ के कारण मिट्टी के कटने से चंबल घाटी का निर्माण हुआ था. इस अभयारण्य का मुख्य उद्देश्य घड़ियालों की प्रजाति को संरक्षित करना तथा उनकी संख्या में वृद्धि करना है. प्रचीन भारतीय ग्रंथ के मुताबिक चंबल को ‘चरमन्यावती’ के नाम से जाना जाता था.
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इको-सेंसिटिव जोन क्या है?
इको-सेंसिटिव जोन या पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास दस किलोमीटर के भीतर के क्षेत्र हैं. इको सेंसिटिव जोन को भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एक्ट 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किया जाता है. राष्ट्रीय उद्यानों एवं वन्यजीव अभयारण्यों के आस-पास इको-सेंसिटिव ज़ोन के लिये घोषित दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निषिद्ध उद्योगों को इन क्षेत्रों में काम करने की अनुमति नहीं है.
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