प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व व्यापार में जगह मजबूत करने हेतु गुजरात के कांडला पोर्ट ट्रस्ट पर 996 करोड़ रुपए की अनेक योजनाओं का शिलान्यास किया. पीएम मोदी ने कांडला बंदरगाह का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय कांडला पोर्ट रखने का सुझाव केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी को दिया.
कांडला पोर्ट को ईरान के चाबहार पोर्ट से जोड़ने के बाद विश्व व्यापार के उद्देश्य से यह एशिया का प्रमुख बंदरगाह बन जाएगा और विश्व व्यापार में नए आयाम स्थापित करेगा.
भारत के सामुद्रिक व्यापार की विरासत हजारों साल पुरानी है. गुजरात के ही लोथल में हजारों साल पहले बंदरगाह पर 84 देशों के झंडे होते थे तथा निकटवर्ती विश्वविद्यालय में 80 से ज्यादा देशों के छात्र भी अध्ययन करते थे.
प्रधानमंत्री ने देश में 7500 किलोमीटर लंबे समुद्र तट तथा इससे जुड़े विकसित जल मार्गों के सस्ते विकल्प के प्रयोग हेतु परिवहन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिससे देश भर में आंतरिक माल-सामान की ढुलाई में लागत में कमी आएगी.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुसार दुनिया को भारत की महान सामुद्रिक ताकत की जानकारी देने हेतु कांडला पोर्ट ट्रस्ट पर मैरीटाइम म्यूजियम बनना चाहिए.
प्रधानमंत्री ने कांडला बंदरगाह पर बड़े पैमाने पर आने वाली लकड़ी में भी कलात्मक मूल्य संवर्धन कर इसे दुनिया के देशों में भेजने का सुझाव दिया
तटीय शहरों में बेहतर संरचना पर जोर-
- पीएम ने बंदरगाहों के निकट पोर्ट सिटी बनाने और जहाजों के बंदरगाह पर जल्दी सामान लादने व उतारने से जुड़े टर्न अराउंड टाइम को कम करने हेतु बेहतर संरचना की जरूरत पर भी जोर दिया.
- कांडला जैसे शहर में बंदरगाह के बेहतर प्रदर्शन से ही 1000 करोड़ के निवेश वाली परियोजनाएं आ रही हैं. कंडला देश के विकास की धुरी बनने के साथ यातायात में भी अहम भूमिका निभा सकता है.
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