पद्म भूषण सैम पित्रोदा ने ओडिशा सरकार के तकनीकी सलाहकार पद से त्यागपत्र दे दिया है. ओडिशा मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पित्रोदा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. वह ओडिशा सरकार के टेक्निकल एडवाइज़र पद पर नियुक्त थे.
सैम पित्रोदा के बारे में-
- सैम पित्रोदा का पूरा नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है.
- चार मई 1942 को उड़ीसा के तितलागढ़ में जन्मे पित्रोदा एक भारतीय अविष्कारक, प्रसिद्ध संचार इंजीनियर, कारोबारी और नीति निर्माता हैं.
- सैम पित्रोदा को भारतीय सूचना क्रांति का अग्रदूत भी माना जाता है.
- पित्रोदा के नाम सौ से भी अधिक पेटेंट हैं.
- साल 2005 से 2009 तक सैम पित्रोदा भारतीय ज्ञान आयोग के चेयरमैन थे.
- पूर्व में पित्रोदा भारतीय प्रधानमंत्री के जन सूचना संरचना और नवप्रवर्तन सलाहकार हैं.
शिक्षा-
- सैम पित्रोदा ने भौतिकी में स्नातकोत्तर किया. उसके बाद वह इलेक्ट्रोनिक्स में मास्टर की डिग्री हासिल करने के लिए शिकागो के इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी गए.
- साठ और सत्तर के दशक में पित्रोदा दूरसंचार और कंप्यूटिंग के क्षेत्र में तकनीक विकसित करने की दिशा में काम करते रहे.
- साल 1984 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पित्रोदा को भारत आकर अपनी सेवाएं देने का न्योता दिया.
- भारत आकर उन्होंने दूरसंचार के क्षेत्र में स्वायत्त रूप से अनुसंधान और विकास के लिए सी-डॉट यानि 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलिमैटिक्स' की स्थापना की.
- रा्ष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित पित्रोदा को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए 2009 में पद्म भूषण प्रदान किया गया.
- पद्म भूषण सैम पित्रोदा ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सलाहकार की हैसियत से घरेलू और विदेशी दूरसंचार नीति को दिशा देने का काम किया.
1990 के दशक में पित्रोदा एक बार फिर अपने कारोबारी हित साधने अमरीका चले गए और लंबे समय तक वहां तकनीकी अनुसंधान का काम किया. 1992 में पित्रोदा संयुक्त राष्ट्र में सलाहकार नियुक्त किए गए.
पिछले साल उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने सैम पित्रोदा को ओबीसी पोस्टर ब्वाय के रूप में उतार कर नया चुनावी समीकरण बनाने की कोशिश की.
पित्रोदा को राज्य सरकार के प्रौद्योगिकी सलाहकार के रूप में कैबिनेट स्तर के मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया था. सैम पित्रोदा कैबिनेट स्तर के मंत्री पद पर रहने के बावजूद एक रुपये प्रति माह का सांकेतिक वेतन प्राप्त करते थे.
आल इण्डिया कांग्रेस कमिटी (एआईसीसी) के विदेश प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के तौर पर पित्रोदा का नाम आने के बाद विपक्षी बीजेपी ने उनके इस्तीफे की मांग की थी.
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