सांगली की हल्दी को जीआई टैग हासिल हुआ

Jun 28, 2018, 12:10 IST

इस उपलब्धि के चलते सांगली हल्दी को ‘सांगली’ ब्रांड के नाम से पूरे भारत तथा विदेश में भी बेचा जा सकेगा. कोई भी अन्य संस्थान, कम्पनी अथवा व्यक्ति ‘सांगली हलद’ या 'सांगली हल्दी' के नाम से इसकी बिक्री नहीं कर सकेगा.

Sangli turmeric gets GI tag
Sangli turmeric gets GI tag

महाराष्ट्र स्थित सांगली की हल्दी को भारतीय पेटेंट कार्यालय से 27 जून 2018 को ज्योग्राफिकल इंडेक्स (जीआई) रैकिंग प्रदान की. सांगली में हल्दी की खेती करने वाले किसान लंबे समय से सांगली ची हलद यानी सांगली की हल्दी को जीआई टैग देने की मांग कर रहे थे.

जीआई टैग का लाभ

इस उपलब्धि के चलते सांगली हल्दी को ‘सांगली’ ब्रांड के नाम से पूरे भारत तथा विदेश में भी बेचा जा सकेगा. कोई भी अन्य संस्थान, कम्पनी अथवा व्यक्ति ‘सांगली हलद’ के नाम से इसकी बिक्री नहीं कर सकेगा. इसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सांगली ब्रांड के नाम से पहचान प्राप्त होगी.


सांगली की हल्दी


•    ऐसा माना जाता है कि लगभग 200 वर्ष पूर्व सांगली के किसानों ने हल्दी उत्पादन एवं इसके भण्डारण के लिए एक विशेष तरीका खोजा था.

•    वे हल्दी को जमीन के नीचे गहरे तक दबा देते थे जिससे हल्दी तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती थी और वह जल्दी ख़राब नहीं होती थी.

•    इस देसी तकनीक से जहां हल्दी की पैदावार बढ़ी वहीं इसके स्वाद एवं गुणवत्ता के कारण यह पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गई.

•    यह फसल यहां के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है.

सांगली के बारे में


सांगली महाराष्ट्र राज्य के प्रमुख शहरों में से एक शहर है. सांगली शहर दक्षिण-पश्चिम भारत के पश्चिम एवं दक्षिण महाराष्ट्र राज्य में स्थित है. सांगली–पुणे-बैंगलोर रेलमार्ग पर कोल्हापुर के पूर्व में कृष्णा नदी के किनारे स्थित है. यह शहर भूतपूर्व सांगली राज्य (1761-1947) की राजधानी था. सांगली संस्थान के वर्तमान राजा विजयसिंहराजे पटवर्धन हैं.

सांगली के आसपास का इलाका कृषि उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. ज्वार, गेहूँ और दलहन यहाँ की मुख्य फ़सलें हैं. सांगली की हल्दी की फ़सल पूरे देश के व्यापक बाज़ार पर नियंत्रण रखती है. इस क्षेत्र की विशेषता यहाँ के अंगूर भी हैं, जिसका एक बड़ा बाज़ार है. गन्ना मुख्य सिंचित फ़सल है, जिसने अनेक स्थानों की चीनी मिलों की उन्नति में सहायता की है.

जीआई टैग क्या है?

•    भौगोलिक संकेतक (Geographical indicator-GI) किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है.

•    जीआई टैग उसी उत्पाद को दिया जाता है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है यहाँ उस उत्पाद का वहां की भौगोलिक ईकाई से विशेष जुड़ाव हो.

•    जीआई टैग प्रदान करना किसी विशिष्ट उत्पाद के उत्पादक को संरक्षण प्रदान करता है जो कि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में उनले मूल्यों को निर्धारित करने में सहायता करता है.

•      यह संकेत प्राप्त होने पर उत्पाद की गुणवत्ता और विशिष्टता सुनिश्चित होती है.

•    भौगोलिक संकेत का टैग किसी उत्पाद की उत्पत्ति अथवा किसी विशेष क्षेत्र से उसकी उत्पत्ति को दर्शाता है क्योंकि उत्पाद की विशेषता और उसके अन्य गुण उसके उत्त्पति स्थान के कारण ही होते हैं.

•    यह दर्शाता है कि वह उत्पाद एक विशिष्ट क्षेत्र से आता है. यह टैग किसानों और विनिर्माताओं को अच्छे बाज़ार मूल्य प्राप्त करने में सहायता करता है.

•    जीआई टैग प्राप्त कुछ उत्पाद हैं- कांचीपुरम सिल्क साड़ी, अल्फांसो मैंगो, नागपुर ऑरेंज, कोल्हापुरी चप्पल, बीकानेरी भुजिया, इत्यादि.

Gorky Bakshi is a content writer with 9 years of experience in education in digital and print media. He is a post-graduate in Mass Communication
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