आम बजट 2017-18 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के प्रभाव को कम करने और छोटी कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु 50 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाली छोटी इकाइयों पर कर की दर मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दी. 2015-16 आकलन वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक 6.94 लाख कंपनियां रिटर्न दाखिल करतीं हैं जिनमें से 6.67 लाख कंपनियां इस श्रेणी में आतीं हैं.
इससे 96 प्रतिशत कंपनियों को कम कर सुविधा का लाभ मिलेगा. एमएसएमई क्षेत्र बड़ी कंपनियों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा. कापरेरेट कर में कटौती से सरकारी खजाने को 7,200 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.
नोटबंदी से आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर में गिरावट के अनुमानों के बावजूद वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष के राजकोषीय घाटे के जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहने के बजट अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया.
इसके साथ ही अगले वित्त वर्ष में इसके 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है.एफआरबीएम कानून के तहत इसे 2017-18 में तीन प्रतिशत रहना चाहिये लेकिन अब यह लक्ष्य एक साल बाद हासिल किया जायेगा.
वर्ष 2017-18 के आम बजट में नोटबंदी से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिये निम्न मध्यम वर्गीय नौकरी पेशा लोगों को आयकर में राहत और छोटे उद्योगों के लिये कंपनी कर में कटौती सहित अनेक उपायों की घोषणा की गई.
किसानों की आय दोगुनी करने, साफ-सफाई, बिजली, रेलवे, सड़क सहित जरूरी ढांचागत सुविधायें उपलब्ध कराने और युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास के साथ रोजगार के अवसर दिलाने के लिये अनेक पहल की गई. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ढाई लाख से पांच लाख रुपये के सालाना आय वर्ग में कर की दर मौजूदा 10 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी.
इस रियायत से पांच लाख रुपये से कम सालाना आय वाले व्यक्तियों की कर देनदारी अन्य छूट सहित या तो शून्य रह जायेगी अथवा उनकी मौजूदा देनदारी का आधी रह जायेगी.
इस कटौती से 15,500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा.
- वित्त मंत्री ने 50 लाख से एक करोड़ रुपये की वार्षिक कमाई करने वालों के आयकर पर 10 प्रतिशत की दर से अधिभार लागू किया है.
- एक करोड़ रुपये से अधिक कमाई पर 15 प्रतिशत की दर से मौजूदा अधिभार पूर्ववत लागू रहे की घोषणा की.
- इस आयकर से सरकार को 2,700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी.
- वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसाए पांच लाख रुपये से कम की वार्षिक आय पर कर दरों में की गई कमी का लाभ पांच लाख रुपये से ऊपर की आय वर्ग के करदाताओं को भी मिलेगा.
- राजमार्गों के लिये 64,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया.
- वस्तु एवं सेवाकर जल्द लागू होने की उम्मीद है, वित्त मंत्री ने अपने बजट में अप्रत्यक्ष करों के साथ ज्यादा छोड़छाड़ नहीं की है. सिगरेट, पान मसाला, तंबाकू और मोबाइल फोन पर शुल्क बढ़ा दिया है.
- ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग, डिजिटल भुगतान में काम आने वाली पीओएस मशीनें, एलएनजी, सौर उर्जा पैनल में काम आने वाले कुछ उपकरण और पवन उर्जा जनरेटर सहित कुछ चीजें सस्ती हुई हैं.
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