NARI 2025 Report: नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स ऑन वीमेन सेफ्टी (NARI) 2025 ने भारतीय शहरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नया दृष्टिकोण पेश किया है। गुरुवार को जारी इस रिपोर्ट में 31 शहरों की 12,770 महिलाओं से सर्वे किया गया और राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर 65 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसमें शहरों को सुरक्षा स्तर के आधार पर "हायर" से लेकर "लोअर" तक की श्रेणियों में बांटा गया, जिससे शहरी सुरक्षा की असली तस्वीर सामने आई। रिपोर्ट को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ़ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार के अवसरों और स्वतंत्र आवाजाही पर सीधा असर डालता है।
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रिपोर्ट में क्या है खास
सर्वे में शामिल 60% महिलाओं ने कहा कि वे अपने शहर में सुरक्षित महसूस करती हैं, जबकि 40% ने खुद को “कम सुरक्षित” या “असुरक्षित” बताया। रिपोर्ट से साफ है कि सभी शहरों में महिलाओं की सुरक्षा समान नहीं है और इसमें गंभीर अंतर मौजूद हैं।
रात और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में गिरती सुरक्षा
रिपोर्ट में बताया गया कि रात के समय और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते वक्त महिलाओं की सुरक्षा की धारणा तेज़ी से गिर जाती है। रिक्रिएशनल स्पेस और मोहल्लों को भी महिलाएं असुरक्षित मानती हैं। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों में 86% महिलाएं दिन के समय सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन कैंपस से बाहर या रात में आत्मविश्वास घट जाता है।
NARI 2025: सबसे सुरक्षित शहर
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कोहिमा
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विशाखापट्टनम
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भुवनेश्वर
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आइज़ॉल
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गंगटोक
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ईटानगर
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मुंबई
कार्यस्थल सुरक्षित, लेकिन भरोसे की कमी
कार्यस्थल अपेक्षाकृत सुरक्षित पाए गए, जहाँ 91% महिलाओं ने सुरक्षा की भावना जताई। हालांकि, लगभग आधी महिलाओं को यह पता ही नहीं था कि उनकी संस्था में POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) नीति है या नहीं। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि सिर्फ़ हर चार में से एक महिला ही अधिकारियों पर भरोसा करती है कि वे सुरक्षा शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करेंगे।
NARI 2025: सबसे कम सुरक्षित शहर
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पटना
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जयपुर
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फरीदाबाद
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दिल्ली
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कोलकाता
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श्रीनगर
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रांची
सार्वजनिक जगहों पर उत्पीड़न और रिपोर्टिंग की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 7% महिलाओं ने सार्वजनिक जगहों पर उत्पीड़न का सामना किया, वहीं 24 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह आंकड़ा 14% तक था। मोहल्लों (38%) और सार्वजनिक परिवहन (29%) को सबसे बड़े हॉटस्पॉट बताया गया। इसके बावजूद, हर तीन में से केवल एक महिला ने ही इसकी रिपोर्ट की। रिपोर्ट ने कहा कि NCRB के अपराध आँकड़े महिलाओं की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाते, क्योंकि दो में से एक महिला शिकायत ही दर्ज नहीं करती।
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