29 जून 2015 को वन एवं पर्यावरण मंत्री बिक्रम केशरी अरुख द्वारा ओडिशा की हाथी जनगणना रिपोर्ट-2015 जारी की गयी. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में हाथियों की संख्या 1930 थी जो वर्ष 2015 में बढ़कर 1954 हो गयी.
सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या सबसे ज्यादा 487 दर्ज की गयी, दूसरे स्थान पर सतकोसिया टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या 234 दर्ज की गयी.
जनगणना के प्रमुख निष्कर्ष
तीन हाथी संरक्षित वनों (ईआर) मयूरभंज, महानदी और संबलपुर में, कुल 1450 हाथी (74.21%) पाए गए. इन क्षेत्रों में आठ अभयारण्य हैं.
5 अन्य अभयारण्यों में : 102 हाथी (5.22%).
ईआर एवं अभयारण्यों से भिन्न : 402 हाथी (20.57%)
वर्ष 2015 में नर: मादा:युवा हाथियों का अनुपात 1096:341:490 अथवा लगभग 3.2:1:1.4 रहा.
वर्ष 2012 में 46 हाथियों की तुलना में वर्ष 2015 में 27 हाथियों के लिंग की पहचान नहीं हो पायी.
वर्ष 2012 की तुलना में 7 नर हाथी अधिक पाए गये, मादा हाथियों की संख्या 9 अधिक तथा अज्ञात लिंग वाले हाथियों की संख्या 19 पाई गयी, एवं युवा हाथी 28 अधिक पाए गए. कुल जनसंख्या में 24 हाथियों की वृद्धि दर्ज की गयी.
एसटीआर मुख्य शाखा में अधिकतम 337 हाथियों की संख्या दर्ज की गयी जबकि ढेंकनाल शाखा में 164 हाथियों को दर्ज किया गया.
मयूरभंज हाथी रिजर्व में सिमलीपाल टाइगर रिजर्व, रैरंग्पुर, बारीपदा, बालासोर वन्य जीव और क्योंझर वन्यजीव प्रभाग शामिल हैं.
महानदी हाथी रिजर्व में सतकोसिया वन्यजीव, महानदी वन्यजीव, अंगुल, ढेंकनाल, अथगढ़, अथमलिक, बौध, नयागढ़ तथा कटक शाखाएं शामिल हैं.
संबलपुर हाथी रिजर्व में झारसुगुडा, संबलपुर, बामरा वन्यजीव, बोनाई तथा रायराखोल प्रभाग शामिल हैं.
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