केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांप्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक 2013 को मंजूरी दी

Dec 31, 2013, 12:25 IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांप्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक 2013 को 16 दिसंबर 2013 को मंजूरी प्रदान की.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांप्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक 2013 को 16 दिसंबर 2013 को मंजूरी प्रदान की. विधेयक का उद्देश्य देश में सांप्रदायिक हिंसा को रोकना और उससे निपटना एवं हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देना है.

विधेयक का नाम सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा की रोकथाम विधेयक (न्याय और क्षतिपूर्ति तक पहुंच) 2013 दिया गया है. विधेयक में शीध्र जांच, मामलों से निपटने और सांप्रदायिक हिंसा से पीड़ितों के लिए राहत और पुनर्वास की सुविधा प्रदान करने के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने का प्रावधान किया गया है. इसमें सांप्रदायिक हिंसा में शामिल व्यक्तियों को कड़ी सजा देने का प्रावधान भी है.

विधेयक के मुख्य तथ्य   
• विधेयक सांप्रदायिक हिंसा को परिभाषित करता है – कोई भी कार्य या कार्यों की श्रृंखला चाहे वह स्वतः या जानबूझकर की गई हो, जिसकी वजह से किसी व्यक्ति या संपत्ति को उसके धार्मिक या भाषाई पहचान को नुकसान पहुंचे.  
• विधेयक में आयोजित सांप्रदायिक हिंसा के लिए आजीवन कारावास की सजा देने का प्रस्ताव. नफरत का प्रचार करने के लिए तीन वर्ष के कारावास या आर्थिक दंड या दोनों दिया जाएगा. सांप्रदायिक हिंसा के लिए पैसा मुहैया कराने पर भी तीन वर्ष की सजा या आर्थिक दंड या दोनों दिया जाएगा.
• कर्तव्य की उपेक्षा करने पर दो वर्ष से लेकर पांच वर्ष की सजा दी जाएगी और आदेशों का उल्लंघन करने पर सजा दस वर्ष तक की हो सकती है.
• इससे पहले दंगों की स्थिति में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की भूमिका एकतरफा होती थी यानि केंद्र सरकार बिना राज्य सरकारों से सलाह– मशविरा किए अर्धसैनिक बलों को भेज सकती थी. इसमें संशोधन किया गया है और अब राज्य सरकारों के पास यह निर्णय लेने का हक होगा कि उन्हें मामले में केंद्र की सहायता की जरूरत है या नहीं.
• विधेयक सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के दौरान किसी भी प्रकार के काम या उसमें होने वाली चूक के लिए नौकरशाहों और सरकारी कर्मचारियों को जवाबदेह बनाता है. हालांकि वैसे नौकरशाहों को, जो सांप्रदायिक हिंसा की स्थिति में अपने वरिष्ठों के अवैध आदेशों का पालन करने से मना करते हैं उन्हें उपेक्षा का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकेगा.  
• विधेयक में सांप्रदायिक हिंसा के शिकार व्यक्ति के परिजनों को 7 लाख रुपये, बलात्कार पीडिता को 5 लाख रुपये, विकलांगता के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये और गंभीर चोट के लिए 2 लाख रुपये के मुआवजा देने की बात कही गई है.

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