प्रसिद्ध हिन्दी लेखक गोविंद मिश्र को 23 सितंबर 2014 को नई दिल्ली में सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया. उन्हें वर्ष 2008 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘धूल पौधों पर’ के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मान किया.
गोविंद मिश्र वर्ष 1991 में डॉ. हरिवंश राय बच्चन के बाद इस सम्मान को प्राप्त करने वाले हिन्दी के दूसरे रचनाकार हैं. केके बिरला फाउंडेशन ने वर्ष 1991 में सरस्वती सम्मान की स्थापना की थी और पहला सम्मान डॉ. हरिवंश राय बच्चन को उनकी आत्मकथात्मक कृति ‘दशद्वार से सोपान तक’ के लिए दिया गया था.
उपन्यास ‘धूल पौधों पर’ के बारे में
यह उपन्यास आधुनिक भारतीय महिलाओं के संघर्ष को दिखाता है और वास्तविकता और रोमांस का कलात्मक मिश्रण है. इस उपन्यास में आधुनिक समय में भारतीय महिलाओं की दुर्दशा का यथार्थवादी चित्रण और एक प्रेम कहानी दोनों को पढ़ा जा सकता है.
गोविंद मिश्र के बारे में
• गोविंद मिश्र का जन्म 1 अगस्त 1939 को अतर्रा (बांदा) उत्तरप्रदेश में हुआ था.
• गोविंद मिश्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए की उपाधि हासिल की और दो वर्षों तक वह अंग्रेजी के प्राध्यापक भी रहे.
• वर्ष 1961 में वह भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुने गए.
• मिश्र केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष और प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय हिन्दी अनुवाद ब्यूरो के निदेशक रहे.
• वर्ष 1997 में अवकाश प्राप्ति के बाद वह भोपाल में रह रहे हैं.
गोविंद मिश्र का पहला उपन्यास ‘वह अपना चेहरा’ वर्ष 1969 में प्रकाशित हुआ था. वर्ष 1976 में उनका प्रसिद्ध उपन्यास ‘लाल पीली जमीन’ काफी चर्चित रहा.
गोविंद मिश्र की प्रकाशित रचनाएं
• 11 उपन्यास
• 14 कहानी संग्रहों में सौ से अधिक कहानियां प्रकाशित हुई.
• 5 यात्रा वृत्तांत
• साहित्यिक निबंध के पांच संग्रह
• एक कविता संग्रह
• बच्चों के लिए 2 कहानी की किताबें
निर्झरिणी’ शीर्षक से दो खंडों में उनकी सम्पूर्ण कहानियां प्रकाशित हुई.
गोविंद मिश्र को वर्ष 2008 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1998 में व्यास सम्मान और वर्ष 2011 में भारत-भारती सम्मान से सम्मानित किया जा चुका हैं.
सरस्वती सम्मान भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट गद्य या कविता साहित्यिक कृतियों की मान्यता के लिए दिया जाता है. यह एक वार्षिक पुरस्कार है. यह सम्मान पिछले 10 वर्षों की साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है.
केके बिरला फाउंडेशन ने वर्ष 1991 में सरस्वती सम्मान की स्थापना की थी और पहला सम्मान डॉ. हरिवंश राय बच्चन को उनकी आत्मकथात्मक कृति ‘दशद्वार से सोपान तक’ के लिए दिया गया था. सरस्वती सम्मान के अंतर्गत एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 10 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित किया जाता है.
केके बिरला फाउंडेशन ने साहित्य के क्षेत्र में तीन पुरस्कारों की स्थापना की है. इसमें सरस्वती सम्मान, व्यास सम्मान (हिंदी के लिए) और बिहारी पुरस्कार (हिन्दी और राजस्थान के राजस्थानी लेखकों के लिए) हैं.
सरस्वती सम्मान 2012 का पुरस्कार 2 अगस्त 2013 को मलयालम कवयित्री सुगाथा कुमारी को मलयालम में कविताओं के संग्रह के लिए दिया गया था.
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